15 महीने का बकरा 95 हजार रुपये में बिका, जानिए इसकी नस्ल और तगड़ा वजन होने का कारण

On: Monday, December 22, 2025 11:00 AM
95 हजार रुपये में कौन सा बकरा बिका है

बकरा पालन करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। बता दें कि बकरे की इस नस्ल का पालन सही तरीके से करके एक ही बकरे से लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं।

95 हजार रुपये में कौन सा बकरा बिका है

अगर एक बकरे से लाखों की कमाई हो जाए, तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। बकरी पालन में फायदा लेने के लिए बकरे को सही तरीके से तैयार करना पड़ता है, जिससे उसे अच्छी कीमत मिल सके। यहां आपको एक ऐसे बकरे की जानकारी देने जा रहे हैं, जिसकी कीमत 95,000 रुपये मिली। इस बकरे की उम्र सिर्फ 15 महीने थी। यह बकरा हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के एक गांव ललवाण का है। आइए आपको इसकी नस्ल और वजन के बारे में बताते हैं।

महंगे बकरे का वजन और नस्ल

अगर इस बकरे की नस्ल की बात करें, तो यह बीटल नस्ल का बकरा था। इसका वजन करीब 130 किलो था। देखने में यह बकरा काले रंग का और मजबूत कद-काठी का था। इसके लंबे-लंबे कान भी झूल रहे थे। इसे देखकर ही इसकी ज्यादा कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता था। बकरे के मालिक का कहना था कि इस बकरे की कीमत 1,20,000 रुपये तक थी, लेकिन आगे भी व्यापारिक संबंध बनाए रखने के लिए उन्होंने इसे 95,000 रुपये में बेच दिया। आगे आपको बताते हैं कि इसे किस प्रतियोगिता में पहला स्थान मिला था और इसे कितने रुपये में खरीदा गया था।

बकरे ने जीती जिला स्तरीय प्रतियोगिता

यह महंगा बकरा जिला स्तरीय प्रतियोगिता जीत चुका था और इसमें इसने प्रथम स्थान प्राप्त किया था, जिससे यह काफी चर्चा का विषय बन गया था। इसके बाद पंजाब के एक व्यापारी ने इसकी खरीद कर ली और अब यह केरल के एक फार्म में देखने को मिलेगा।

दरअसल, इस बकरे को केरल के एक ब्रीडिंग फार्म में रखा जा रहा है, ताकि इसी तरह के और बकरे तैयार किए जा सकें। इस बकरे की लंबाई अधिक थी। इसे खाने में देसी चीजें दी जाती थीं, यानी बाजार से खरीदा हुआ रेडी फीड नहीं, बल्कि गेहूं, बाजरा और आसपास की हरी घास खिलाई जाती थी।

इसे भरपूर चलने-फिरने का मौका भी दिया जाता था, जिससे यह बेहद स्वस्थ रहा। इसकी ऊंचाई लगभग 4 फीट थी। अश्विनी कुमार ने जब इसे खरीदा था, तब यह सिर्फ 5 महीने का था और इसकी कीमत 25,000 रुपये थी। करीब 10 महीने तक अच्छी देखभाल के बाद इसका वजन बढ़कर 130 किलो हो गया और इसकी मजबूत कद-काठी देखने लायक बन गई।

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