धान की फसल में कीटों का प्रकोप बारिश की नमी से बहुत बढ़ जाता है संक्रमित पौधे में कीट दिखते ही जल्द से जल्द नियंत्रण के उपाय करना चाहिए। तो आइये जानते है कौन सा कीट है और कैसे उससे फसल को बचाना है।
धान की फसल में कीटों का आतंक
धान की फसल में बुवाई से लेकर कटाई के समय तक अलग-अलग कीटों का खतरा बना ही रहता है धान की फसल में दूध भरते समय चैफर बीटल कीट का बहुत आतंक मचा हुआ होता है ये कीट दूधिया भाग को खा जाता है। यानि दानों के रस को चूस लेता है जिससे दानों की गुणवत्ता खत्म हो जाती है। इसकी रोकथाम के लिए उचित समय पर उचित उपाय करना बहुत जरुरी होता है जिससे फसल खराब होने से बच जाती है इसके अलावा धान की फसल में गंधक कीट भी एक आम समस्या है ये कीट धान की बालियों के रस को चूसकर उसे खोखला कर देता है जिससे दानों का वजन कम होता है साथ ही बंपर उत्पादन में बहुत ज्यादा गिरावट होती है।

धान की फसल में करें इस दवा का छिड़काव
धान की फसल में गंधक कीट और चैफर बीटल कीट की रोकथाम के लिए हम आपको इमिडाक्लोप्रिड दवा के बारे में बता रहे है ये एक प्रणालीगत कीटनाशक है जो धान की फसल में लगे गंधक कीट और चैफर बीटल कीट जैसे कई अन्य कीटों को जड़ से खत्म करने में उपयोगी होता है इसे चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए एक लागत प्रभावी समाधान माना जाता है। ये दवा आपको बाजार में कीटनाशकों की दुकान में आसानी से मिल जाएगी इसमें मौजूद तत्व फसल को कीटों से सुरक्षित रखते है जिससे धान की पैदावार अच्छी होती है।
इस प्रकार करें उपयोग
धान की फसल में कीट नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड दवा का उपयोग बहुत अच्छा माना जाता है इसका इस्तेमाल करने के लिए एक लीटर पानी में 1 एमएल दवा को मिलाकर फसल में स्प्रे पंप की सहायता से पत्तियों पर छिड़काव करना है। इसका छिड़काव सुबह या शाम के समय करना है। ध्यान रहे तेज हवा या बारिश के दौरान इसका उपयोग नहीं करना है।
नोट: इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी किसानों के निजी अनुभवों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इंटरनेट स्रोतों पर आधारित है। किसी भी जानकारी का उपयोग करने से पहले कृषि विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य करें।