धान की फसल में दानों को नष्ट कर देगा ये रोग, बचाव के लिए तुरंत करें ये घोल का छिड़काव उत्पादन में होगी जोरदार बंपर वृद्धि, जानिए उपाय

On: Saturday, August 30, 2025 5:47 PM
धान की फसल में दानों को नष्ट कर देगा ये रोग, बचाव के लिए तुरंत करें ये घोल का छिड़काव उत्पादन में होगी जोरदार बंपर वृद्धि, जानिए उपाय

धान की खेती में इस रोग के लक्षण दिखते ही तुरंत रोकथाम के उपाय करना आवश्यक होता है जिससे धान की फसल के उत्पादन में गिरावट नहीं होती है और फसल रोग से सुरक्षित रहती है।

धान की फसल में दानों को नष्ट कर देगा ये रोग

धान की फसल में कीटों और रोगों का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी चुनौती साबित होता है जब धान की बालियां फूल बनने की अवस्था में होती है तब नमी के कारण कंडुआ रोग का प्रभाव बढ़ जाता है। कंडुआ रोग का मुख्य लक्षण ये है की धान की बालियों पर हरे-पीले पाउडर जैसे गुच्छे बन जाते है। ये एक फंगस है ये रोग 25-35°C तापमान में फंगस हवा से फैलता है जिससे धान के दाने नष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है। इस रोग के लक्षण दिखते ही जल्द से जल्द नियंत्रण के उपाय करना आवश्यक होता है। तो चलिए जानते है इसकी रोकथाम के लिए किस दवा का उपयोग करना चाहिए।

ये घोल का करें छिड़काव

धान की फसल में लगे कंडुआ रोग को जड़ से खत्म करने के लिए हम आपको टेबुकोनाजोल दवा के बारे में बता रहे है ये एक प्रणालीगत कवकनाशी है जो धान की फसल में लगे कंडुआ रोग को नियंत्रित करने में सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होती है ये दवा न केवल कंडुआ रोग को खत्म करती है बल्कि शीथ ब्लाइट, भूरे पत्ती के धब्बे, ब्लास्ट और गंदे पैनिकल जैसे कई फंगल रोगों का सफाया करती है ये फसल को फंगस के कारण होने वाले नुकसान को कम करके फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को बढ़ाती है जिससे धान की उपज शानदार होती है।

उपयोग और सावधानियां

धान की फसल में कंडुआ रोग को खत्म करने के लिए टेबुकोनाजोल दवा का उपयोग करने से पहले उत्पाद के लेबल और लीफलेट पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़कर करना चाहिए। इसे 1.5-2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर संक्रमित पौधों पर छिड़काव कर सकते है। इसका उपयोग उचित मात्रा में ही करना चाहिए ज्यादा करने से धान की फसल को नुकसान भी हो सकता है। इसका छिड़काव शाम के समय करना उचित होता है लेकिन बारिश के समय नहीं करना है।

नोट: इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी किसानों के निजी अनुभवों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इंटरनेट स्रोतों पर आधारित है। किसी भी जानकारी का उपयोग करने से पहले कृषि विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य करें।

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