Makoy cultivation: यह फसल है किसानों की किस्मत चमकाने की चाबी, प्रति बीघा 50 हजार रु का देती है मुनाफा, खर्चा महज 8 हजार रु

On: Monday, February 2, 2026 9:00 AM
Makoy cultivation

Makoy cultivation: किसान अगर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फसल की तलाश में है तो आइये बताते हैं सर्दी में कौन सी खेती मुनाफा दे रही।

मकोय की खेती

धान गेहूं से हटकर भी किसान कई तरह की फसलों की खेती इस समय कर रहे हैं। जिनसे उन्हें कम लागत में ज्यादा फायदा हो रहा है. जैसे कि जहानाबाद के किसानों को मकोय की खेती अच्छा खासा मुनाफा दे रही है। वहां के किसान मकोय की खेती करके बेहद कम खर्चे में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं और अपने परिवार को एक अच्छा भविष्य भी दे रहे हैं।

वह बताते हैं कि उनके क्षेत्र में फल, सब्जी और फूलों की खेती किसान करते हैं जिससे उन्हें ज्यादा फायदा होता है। इसमें मेहनत, समय, और लागत की भी बचत होती है। जिसमें वह कहते हैं कि मकोय की खेती करते हैं तो ₹8000 में 40 से ₹50000 की कमाई हो जाती है तो आइये बताते हैं मकोय की खेती कब की जाती है, कब उत्पादन मिलता है।

मकोय की खेती का समय

किसान बताते हैं कि जुलाई के समय पर वह मकोय की खेती करते हैं, अगर आप मकोय की खेती करना चाहते हैं तो बता दे कि इसके बीजों की बुवाई अप्रैल से मई के बीच में की जाती है। फिर नर्सरी तैयार होती है, और फिर नर्सरी के 20 दिन बाद उन्हें खेतों में लगाया जाता है।

मकोय की फसल गुणकारी होती है, सूजन रोधी, दर्द निवारक गुण इसमें होते हैं। कई तरह के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसकी खेती में किसानों को फायदा होता है। मकोय के फल की इस समय बिक्री कर रहे हैं। सरस्वती पूजा से फल निकलने लगता है जो की छठ पूजा तक चलता है। इसके बाद फिर अंतिम में बीज के लिए यह फल छोड़ देते हैं और फिर उनकी बुवाई करके दोबारा खेती करते हैं।

मकोय के बीज छोटे पीले रंग के चिकनी होते हैं यह बैगन के बीज की तरह दिखाई देते हैं लेकिन उनसे ज्यादा छोटे होते हैं यह जब पक जाते हैं तो इसका फल मीठा होता है

मकोय की खेती के लिए खाद

मकोय की खेती के लिए जैविक खाद का किसान इस्तेमाल करें तो ज्यादा बेहतर होता है। क्योंकि यह औषधीय गुण वाली फसल होती है और जैविक खाद में खर्च भी कम आता है ,अच्छा उत्पादन लेने के लिए नियमित रूप से सिंचाई किसानों को करनी चाहिए और खरपतवार से फसल का बचाव करना चाहिए। पौधों की रोपाई के दो से तीन महीने में फसल तैयार हो जाती है और फिर हरे भरे काले रंग के फल आने लगते हैं। किसान बताते हैं की नदी के किनारे रेतीले जमीन में खेती करते हैं। जिससे फसल को विकसित होने के लिए सही मिट्टी मिलती है।

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