किसान अगर नीलगाय जंगली जानवरों को खेतों से दूर रखना चाहते हैं, फसल पर लगने वाले कीट और बीमारियों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो जल्द ही इस घोल को बनाएं।
खेतों में जानवरों का बढ़ता आतंक
फसल की सुरक्षा किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सिर्फ जंगली जानवर ही नहीं, बल्कि आवारा पशु भी किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सरकार गौशालाएं बनवा रही है, लेकिन फिर भी आवारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है। दिन में आवारा पशु और रात में जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इन सब समस्याओं से अगर फसल बच भी जाती है, तो फिर कीट और रोग लग जाते हैं, जिससे फसल खराब हो जाती है। अगर किसान खेत में जैविक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं, तो मिट्टी रासायनिक खाद के कारण खराब होती जाती है।
इसलिए यहां आपको एक ऐसे चमत्कारी घोल की जानकारी देने जा रहे हैं, जिससे खेत की मिट्टी भी अच्छी होगी, फसल में बीमारी नहीं लगेगी और नीलगाय व आवारा जानवर खेतों से दूर रहेंगे। इससे फसल पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। आइए जानते हैं यह घोल कैसे बनता है और किस तरीके से काम करता है।
किसान जंगली जानवरों को खेत से दूर रखने के लिए क्या करें
किसान जंगली जानवर, नीलगाय, आवारा पशु आदि को खेत से दूर रखने के लिए इस घोल को फसल पर छिड़क सकते हैं। इसकी गंध से जानवर फसल नहीं खाते हैं और फसल में कीट व बीमारी भी नहीं लगती है। बड़े से लेकर छोटे सभी तरह के जानवर फसल से दूर रहते हैं। इसे कैसे बनाना है, आइए नीचे दिए गए बिंदुओं के अनुसार जानते हैं।
घोल बनाने की विधि
सबसे पहले आपको गोबर और पानी लेना है। गोबर की मात्रा से दोगुनी मात्रा में पानी लें और दोनों को अच्छी तरह से मिला लें। इसके बाद इसमें भांग का रस मिलाएं। इस घोल को 2 दिन के लिए ढककर एक जगह पर रख दें। दो दिन बाद इसमें तेज गंध आना शुरू हो जाएगी। इसके बाद इस घोल को खेतों में छिड़क दें। इस घोल के छिड़काव से मिट्टी भी अच्छी होती है, जिससे पैदावार बढ़ती है। हर तरह से यह घोल किसानों के लिए बहुत ही लाभकारी है।

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