जिन किसानों के खेतों में पानी अधिक जमा होता है, उनके लिए यह फसल मुनाफे वाली साबित होगी। आइए जानते हैं कि सरकार से कैसे मदद मिलती है।
कमल ककड़ी की खेती
यहां कमल ककड़ी की खेती की बात की जा रही है, जिससे किसानों को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी होते हैं। इससे किसान कमल के फूल, कमलगट्टा और कमल ककड़ी बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। गांव और शहर दोनों जगह इसकी अच्छी मांग है, इसलिए इसकी खेती में मुनाफा है। यही वजह है कि सरकार भी किसानों को इसकी खेती के लिए सहयोग दे रही है। तो आइए जानते हैं कि कमल ककड़ी की खेती कैसे होती है।
कमल ककड़ी की खेती कैसे होती है?
कमल ककड़ी की खेती के लिए ऐसे खेत की जरूरत होती है, जहां पर पानी भरा रहता हो। जिन किसानों के खेतों में अधिक पानी भर जाता है और वे दूसरी फसल नहीं लगा पाते, वे कमल ककड़ी की खेती कर सकते हैं। इसके लिए खेत में पानी को स्टोर किया जाता है। इसकी खेती के लिए चिकनी या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। खेत की अच्छे से सफाई कर लें। यदि पहले से पानी भरा है, तो उसे साफ करें और उसके बाद बीजों की बुवाई करें। चाहें तो पहले नर्सरी तैयार करके फिर सीधे पौधों की रोपाई भी कर सकते हैं।
यह फसल तैयार होने में लगभग 3 से 4 महीने और कभी-कभी 5 महीने तक का समय लेती है। कटाई के समय पौधों को बहुत सावधानी से काटा जाता है, ताकि जड़ों को नुकसान न पहुंचे और दोबारा उसी जड़ से फसल ली जा सके।
कमल ककड़ी की खेती के लिए सब्सिडी कैसे मिलती है?
कमल ककड़ी की खेती के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा भी कुछ योजनाएं हैं, जो इस तरह की फसलों की खेती के लिए किसानों की आर्थिक मदद करती हैं। इसके लिए किसानों को अपने कृषि विभाग में जाकर जानकारी लेनी चाहिए। उन्हें प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाता है। आपको बता दें कि छोटे मंडियों से लेकर बड़ी मंडी, होटल-रेस्टोरेंट आदि में इसकी लगातार मांग रहती है। बस गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए।

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