गौशाला निर्माण के लिए सब्सिडी: पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए गौशाला निर्माण के लिए मध्य प्रदेश सरकार दे रही 10 लाख की सब्सिडी

On: Tuesday, August 26, 2025 10:58 AM
सब्सिडी

वर्ष 2028 तक मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाएंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव। उन्होंने गोवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत गौशाला यूनिट स्थापित करने के लिए पशुपालकों को ₹10 लाख तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, साथ ही अच्छी कीमत पर दुग्ध-उत्पादन भी खरीदा जाएगा। रतलाम ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के कुंडाल गांव में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह ऐलान किया।

गौशालाओं के निर्माण के लिए कितनी राशि माफ की जाएगी ?

इस योजना के तहत  25 गाय और 42 लाख रुपये तक की गौशाला यूनिट स्थापित करने पर दूध और अन्य उत्पाद तो पशुपालक के होंगे, लेकिन सरकार पशुपालक को 10 लाख रुपये प्रोत्साहन अनुदान के रूप में देगी। बड़ी गौशालाओं के निर्माण पर सरकार लागत की 25 प्रतिशत तक की निवेश राशि अनुदान के रूप में माफ करेगी।

कितना % सब्सिडी मिलेगा

इसमें गायों और भैंस वंश के लिए तय लागत 36 लाख से 42 लाख रुपए पर 33 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। योजना के तहत अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति श्रेणी के पशुपालकों के लिए 33 प्रतिशत और अन्य वर्ग को परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। 

अनुदान राशि का भुगतान चार किस्तों में किया जाएगा। पहली किस्त में पशुओं के लिए शेड निर्माण के लिए राशि दी जाएगी। फिर चौथे, आठवें और बारहवें माह में पशु क्रय करने के लिए राशि दी जाएगी। देशी नस्ल और संकर नस्ल के मुताबिक, भुगतान राशि में थोड़ा अंतर होगा। जैसे कि 8 वें माह की किस्त में देशी नस्ल के पशु क्रय करने के लिए 8 लाख और संकर नस्ल के लिए 9.80 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। 

चयन कैसे होगा 

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया http://www.mpdah.gov.in के वेबसाइट पर चलेगी और इसमें चयन “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर होगा। इस योजना में एक यूनिट में 25 दुधारू पशु रखने होंगे। सभी पशु एक ही नस्ल के होने चाहिए। मतलब, गाय और भैंस को मिलाकर नहीं रख सकते। इसमें देशी गायों की नस्लें – साहीवाल, गिर, थारपारकर, लाल सिंधी, कांकरेज शामिल हैं। संकर गायों में – एचएफ और जर्सी, भैंसों में – मुर्रा, भदावरी, नीली-रावी, जाफराबादी, सुरती और मेहसाणा को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना से जुड़ी पूरी जानकारी आपको विभाग की वेबसाइट पर मिलेगी।

सरकार की इस पहल से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, क्योंकि गौशालाएं न केवल गोवंश का संरक्षण करेंगी, बल्कि गोबर, गौमूत्र और दूध के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी।

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