बरसात के मौसम में बंजर धरती भी सोना उगलेगी। ये घास की खेती न केवल गाय-भैंस जैसे पशुओं के चारे के लिए उपयुक्त होती है बल्कि बंजर जमीन की उर्वकता को भी बड़ा देती है।
बंजर भूमि में करें ये 2 तरह की घास की बुवाई
आज हम आपको कुछ ऐसी फसलों की खेती के बारे में बता रहे है जो कम मेहनत और जीरो इन्वेस्टमेंट में तैयार हो जाती है ये घास पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होती है इसकी डिमांड बाजार में काफी ज्यादा होती है क्योकि लोग अपने पशुओं को ये घास खिलाना ज्यादा पसंद करते है। इन घास में प्रोटीन, कैल्शियम और फाइबर जैसे कई पोषक तत्व के गुण बहुत अधिक मात्रा में होते है जो गाय-भैंस के दूध देने की क्षमता को कई गुना बड़ा देते है। जिससे पशु पालकों को बहुत मुनाफा होता है।
बरसीम की खेती
बरसीम एक ऐसी फसल है जो गाय-भैंस जैसे पशुओं का सबसे फेवरेट फ़ूड होती है ये न केवल दूध उत्पादन को बढ़ाती है बल्कि मिट्टी की उर्वकता को भी बढ़ाती है जिससे जमीन अधिक उपजाऊ होती है। इस चारे के सेवन से पशुओं की सेहत भी अच्छी रहती है इस घास को एकबार उगाने के बाद कई बार कटाई की जा सकती है।बुवाई से पहले खेत की जुताई करना चाहिए। बुवाई के लिए बीज की मात्रा करीब 8-10 किलो प्रति एकड़ होनी चाहिए। इसकी खेती में खाद की जरूरत नहीं पड़ती है बुवाई के बाद बरसीम की फसल करीब 50 दिनों में प्रथम कटाई के लिए तैयार हो जाती है।

नेपियर घास की खेती
नेपियर घास की खेती बहुत लाभदायक होती है इसकी खेती में मेहनत लागत सब बहुत कम लगता है और पशुओं के लिए उच्च क्वालिटी का चारा प्राप्त होता है नेपियर घास पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है इसकी बुवाई एकबार करने के बाद करीब 6 से 7 साल तक इस घास की पैदावार मिलती रहती है ये घास गाय, भैस और बकरी जैसी कई पशुओं को भरपूर पोषण देने का उच्च स्रोत होती है। नेपियर घास में 55 से 60% एनर्जी तत्व और 8 से 10% प्रोटीन होता है जो पशुओं के लिए बहुत गुणकारी साबित होता है नेपियर घास को हाथी घास भी कहा जाता है। इसकी खेती जरूर करना चाहिए

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