सौंफ की खेती कैसे करें, इसकी खेती का समय, उत्पादन बढ़ाने के लिए खाद, खर्चा और मुनाफा, चलिए सब कुछ जानते हैं।
सौंफ का इस्तेमाल
सौंफ की खेती में फायदा इसीलिए है क्योंकि इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा है। सौंफ का इस्तेमाल पाचन सुधारने में, सांस की दुर्गंध दूर करने में, वजन घटाने में, त्वचा को चमकदार बनाने में तथा महिलाएं मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं से राहत पाने के लिए भी करती हैं।
सौंफ को माउथ फ्रेशनर की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है तथा यह शरीर के विषैले पदार्थ को बाहर निकालने की क्षमता रखता है। इसलिए सौंफ की डिमांड काफी कंपनियां करती हैं। इसीलिए इसके कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग या मूल्य संबंधित उत्पाद बनाकर अच्छी कमाई की जा सकती है।

सौंफ की खेती का समय
सौंफ की खेती कुछ किसान खरीफ सीजन में करते हैं, तो कुछ रबी सीजन में। मैदानी क्षेत्रों के किसान अक्टूबर से नवंबर के बीच बुवाई करते हैं। वहीं, पहाड़ी इलाकों के किसान जून में सौंफ की बुवाई करते हैं। सौंफ की खेती के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु अच्छी मानी जाती है। यह एक लंबी अवधि की फसल होती है, जिसे तैयार होने में 140 से 225 दिन तक का समय लग सकता है।
सौंफ की खेती कैसे करें
सौंफ की खेती के लिए सबसे पहले बढ़िया खेत तैयार करें। बलुई दोमट मिट्टी, रेतीली मिट्टी और जल निकासी वाली काली मिट्टी सौंफ की खेती के लिए अच्छी मानी जाती है। खेत तैयार करते समय अच्छी जुताई करके खरपतवार हटा दें। इसके बाद अंतिम जुताई से पहले सड़ी हुई गोबर की खाद और फास्फोरस वाले उर्वरक मिट्टी में मिला दें। इससे मिट्टी उपजाऊ होगी और आगे चलकर ज्यादा उत्पादन मिलेगा।

बुवाई से पहले बीजों को उपचार कर लें। सौंफ की बुवाई आप छिटककर या पंक्तियों में कर सकते हैं। अगर पंक्तियों में करना चाहें तो दो पौधों के बीच की दूरी 45 सेमी और दो लाइनों के बीच की दूरी 60 सेमी रखें। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें और समय-समय पर पानी देते रहें। खरपतवार पर नियंत्रण रखना जरूरी है, नहीं तो विकास पर असर पड़ सकता है और कीड़े व रोगों की समस्या बढ़ सकती है।
सौंफ की फसल के लिए खाद
सौंफ की फसल के लिए खाद की बात करें तो इसमें गोबर की खाद सबसे अच्छी रहती है, लेकिन कई किसान रासायनिक खाद का भी इस्तेमाल करते हैं। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश बुवाई के समय दिया जाता है। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और बाकी आधी मात्रा बुवाई के 30 से 60 दिन बाद दो बार दी जाती है। फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय ही दी जाती है।
एक हेक्टेयर में लगभग 90 किलोग्राम नाइट्रोजन, 30 से 40 किलो फास्फोरस और 20 किलो पोटाश की जरूरत पड़ती है। हालांकि किसानों को सबसे अच्छा यही है कि वे मिट्टी की जांच जरूर कराएं और जितनी जरूरत हो उतना ही खाद डालें।

सौंफ की खेती में खर्च और कमाई
सौंफ की खेती से कई किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, क्योंकि वे इसे आधुनिक तरीके से कर रहे हैं। जैसे कि हरियाणा के सिरसा जिले के किसान सतबीर डेहरू, वे 2023 से सौंफ की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में लगभग 800 ग्राम बीज की जरूरत पड़ती है। फसल 150 से 180 दिन के बीच तैयार हो जाती है। एक एकड़ में 8 से 10 क्विंटल उत्पादन मिल जाता है। इससे वह करीब ₹2,00,000 तक की कमाई कर लेते हैं, क्योंकि उन्हें प्रति क्विंटल 18 से 20 हजार रुपये तक कीमत मिलती है।
वे अपनी उपज राजस्थान में सप्लाई करते हैं। इस तरह, अगर किसान सौंफ की खेती कर रहे हैं, तो बाजार की जानकारी जरूर रखें कि बिक्री कहां करनी है और कितनी कीमत मिलेगी। तभी इसमें अच्छा मुनाफा है।