धान की खेती में जैविक खाद का इस्तेमाल न केवल पैदावार को बढ़ाता है बल्कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाता है जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है और उत्पादन भी जबरदस्त होता है।
धान की उपज में होगी दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि
बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा मात्रा में किसान धान की खेती करना पसंद करते है इसकी खेती में अधिकतर किसान खरपतवार के लिए अलग दवा कीटों के लिए अलग कीटनाशक दवा जैसे विभिन्न प्रकार की रासायनिक दवा और उर्वरक का इस्तेमाल करते है जिससे धान की गुणवत्ता में काफी असर पड़ता है और मिट्टी की उर्वकता भी कम होती है। आज हम आपको एक ऐसे जैविक उर्वरक के बारे में बता रहे है जो धान की फसल के लिए सबसे लाभदायक और प्रभावी साबित होता है ये उर्वरक फसल की गुणवत्ता और रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ता है साथ ही खरपतवार को नियंत्रित करता है।

धान की फसल में डालें ये सस्ती चीज
धान की फसल में डालने के लिए हम आपको अजोला के बारे में बता रहे है ये एक प्रकार का जलीय फर्न है जो जैविक उर्वरक का काम करता है इसमें नाइट्रोजन की उच्च मात्रा मौजूद होती है इसका इस्तेमाल उर्वरक के रूप में करने से रासायनिक खाद की आवश्यकता नहीं पड़ती है जिससे फसल को भरपूर पोषण मिलता है और पौधों की वृद्धि अच्छी होती है ये मिट्टी की उर्वकता को बढ़ाता है और पौधों को प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व प्रदान करता है। जिससे उत्पादन बहुत अच्छा मिलता है।
ऐसे करें इस्तेमाल
धान की फसल में अजोला का इस्तेमाल बहुत ज्यादा लाभकारी और उच्च गुणकारी साबित होता है इसका उपयोग करने के लिए धान की रोपाई के बाद खेत में भरे हुए पानी में करीब 100-200 किलो ताजा अजोला को प्रति एकड़ फसल में फैला देना चाहिए जिससे अजोला पानी में तैरता रहता है और धीरे-धीरे गलकर सड़कर मिट्टी में मिल जाता है और मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बन जैसे पोषक तत्व छोड़ता है जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है साथ ही मिट्टी में खरपतवार भी कम उगते है। ऐसा करने से केमिकल खाद की जरूरत नहीं पड़ती है।
नोट: इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी किसानों के निजी अनुभवों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इंटरनेट स्रोतों पर आधारित है। किसी भी जानकारी का उपयोग करने से पहले कृषि विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य करें।