किसानों को सस्ते में मिलेंगे आधुनिक कृषि यंत्र, सबके गांव में खुलेगा कस्टम हायरिंग सेंटर, जानिए छोटे किसानों के आमदनी कैसे बढ़ेगी

On: Thursday, December 18, 2025 10:50 AM
कस्टम हायरिंग सेंटर कहां खुल रहे हैं

किसानों को अब कृषि यंत्र के लिए ज्यादा किराया नहीं देना पड़ेगा, कम दाम में उन्हें महंगे कृषि यंत्र मिलेंगे, तो आईए जानते हैं कहां-कहां कस्टम हायरिंग सेंटर खुलेगा।

कस्टम हायरिंग सेंटर कहां खुल रहे हैं

कस्टम हायरिंग सेंटर खुल जाने से किसानों को सस्ते में कृषि यंत्र उपलब्ध होते हैं। इसके अंदर कई तरह के कृषि यंत्र होते हैं जो कि किसानों को खेती का इस्तेमाल के लिए दिए जाते हैं। जिसमें बिहार में जैसा कि आप जानते हैं 90% किसान ऐसे हैं जो लघु एवं सीमांत श्रेणी में आ रहे हैं, तो बिहार के किसानों के लिए चतुर्थ कृषि रोड मैप में सभी पंचायत में कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने का फैसला सरकार ने लिया है। जिसमें बिहार में लगभग 267 नए कस्टम हायरिंग सेंटर खोले जाएंगे। बताया जा रहा है कि 950 पंचायत में कस्टम हायरिंग केंद्र खुले हुए हैं और 2025-26 में 267 हायरिंग सेंटर खुलेंगे।

किन किसानों को मिलता है कस्टम हायरिंग सेंटर का फायदा

कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने का सरकार का उद्देश्य यही होता है कि लघु और सीमांत किसान जो कि छोटे किसान होते हैं वह महंगे कृषी उपकरण जैसे के ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेसर का इस्तेमाल कर पाए। यहां पर और भी कई प्रकार की कृषि यंत्र होते हैं जो कि किसानों को किराए पर मिलते हैं। इससे समय और मेहनत की बचत होती है। महिला किसानों के लिए तो बहुत ही ज्यादा मददगार होते हैं।

साथ ही आपको बता दे की यह खुलने के लिए प्रगतिशील किसान, जीविका समूह, आत्मा से संबंध फार्मर इंटरेस्ट ग्रुप, क्लस्टर फेडरेशन, कृषक उत्पादक संगठन, नाबार्ड या राष्ट्रीयकृत बैंकों से संबंधित किसान क्लब, किसान उत्पादक कंपनी, स्वयं सहायता समूह और पैक्स से जुड़े किसानों को 10 लाख रुपए तक अनुदान मिलता है। जिससे एक बढ़िया केंद्र खोला जा सकता है।

कस्टम हायरिंग सेंटर खुलने से किसानों को क्या फायदे होंगे

कस्टम हायरिंग केंद्र खुलने से किसानों को बहुत फायदा होगा। इससे उनके आमदनी में वृद्धि हो सकती है। क्योंकि खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा, समय की बचत होगी, मेहनत की भी बचत होगी। अगर किसान खेत की तैयारी, फसल की कटाई आदि में कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करते हैं तो बढ़िया उत्पादन मिलेगा। साथ ही मजदुर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी या खुद मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। समय पर फसल तैयार होकर, उसकी कटाई हो पाएगी, जिससे किसानों को बहुत ज्यादा फायदा होगा।

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