MP के किसानों को मिलेंगे ₹6 लाख, नरवाई प्रबंधन के लिए कई कृषि यंत्रों पर भारी सब्सिडी दे रही सरकार, कटाई के तुरंत बाद कर पाएंगे बुवाई

On: Saturday, September 13, 2025 3:00 PM
नरवाई प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान

MP सरकार नरवाई प्रबंधन के लिए किसानों को ₹6 लाख रुपए तक कृषि यंत्रों पर अनुदान दे रही है। चलिए जानते हैं कि इसका फायदा कैसे मिलेगा।

नरवाई प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर अनुदान

नरवाई प्रबंधन बहुत जरूरी है। अगर सही तरीके से नरवाई का प्रबंधन नहीं किया जाए तो कई तरह के नुकसान होते है मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है और पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है। इसीलिए मध्य प्रदेश के कृषि विभाग द्वारा किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए कई उन्नत कृषि यंत्रों पर ₹6 लाख तक का अनुदान दिया जा रहा है। इसमें हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, बेलर जैसे आधुनिक कृषि यंत्र शामिल हैं। भारी सब्सिडी के कारण ये यंत्र अब कम खर्च में उपलब्ध हैं। इनकी मदद से खेत की सफाई किए बिना, फसल की कटाई के तुरंत बाद बुवाई की जा सकती है।

इन कृषि यंत्रों पर मिल रही है ₹6 लाख तक की सब्सिडी

नरवाई प्रबंधन के लिए कई तरह के कृषि यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और स्मार्ट सीडर। इन पर एमपी में कृषि विभाग द्वारा निम्नानुसार अनुदान दिया जा रहा है:

  • हैप्पी सीडर पर ₹86,400
  • सुपर सीडर पर ₹1,20,000
  • स्मार्ट सीडर पर ₹90,200
  • बेलर पर ₹6,60,000

इन कृषि यंत्रों की मदद से पराली का प्रबंधन करना आसान हो जाता है। मजदूरों की आवश्यकता कम होती है और खेत की मिट्टी भी उपजाऊ बनी रहती है।

अगर आप धान, गेहूं, मूंग या सोयाबीन की खेती करते हैं तो यह कृषि यंत्र आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं। कटाई के तुरंत बाद ही बुवाई का कार्य पूरा किया जा सकता है, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है।

अनुदान के लिए यहां करें ऑनलाइन आवेदन

एमपी के किसान कृषि यंत्रों पर अनुदान पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। साथ ही आपको यह भी बता दें कि आवेदन के साथ डिमांड ड्राफ्ट (DD) भी संलग्न करना होगा, जो सहायक यांत्रिक कृषि विभाग के नाम पर होगा। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और स्मार्ट सीडर के लिए ₹4,500 की डीडी बेलर मशीन के लिए ₹15,000 की डीडी

आवेदन राज्य कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://dbt.mpdage.org/Modules/ पर जाकर किया जा सकता है। इससे पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ना ही किसी तरह का जुर्माना देना होगा।

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