खेती का खर्चा होगा आधा कमाई दोगुनी, यह स्मार्ट तरीके अपनाए, खेती को सस्ती बनाएं

On: Wednesday, July 30, 2025 4:40 PM
खाद और कीटनाशक का खर्चा कैसे घटाएं

खेती का खर्चा घटाना चाहते हैं तो चलिए कुछ ऐसे तरीके बताते हैं जिससे लागत कम आएगी लेकिन उत्पादन बढ़ेगा जिससे आमदनी अधिक होगी-

खेती खर्च अधिक हो रहा है?

खेती में कई तरह के खर्चे आते हैं, बीज की बुवाई से लेकर कटाई तक विभिन्न प्रकार के खर्चों से किसानों को गुजरना पड़ता है। जिससे अंत में लागत कम हो जाती है। वही खर्चा और मेहनत अधिक हो जाता है। ऐसे में कई किसान निराश हो जाते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कुछ ऐसे तरीके जिससे खेती के खर्च को घटाया जा सकता है।

खाद और कीटनाशक का खर्चा कैसे घटाएं

किसान भाई की खेती में आने वाले खाद और कीटनाशक के खर्चे को घटा सकते हैं। अगर छोटे किसान है तो जैविक खेती कर सकते हैं। जिसमें लहसुन, नीम, गौमूत्र और मिर्च का घोल से घरेलू कीटनाशक तैयार कर सकते हैं। तथा जैविक खाद इस्तेमाल कर सकते है। जैसे कि वर्मी कंपोस्ट, जीवामृत इत्यादि। घर पर बनाकर रासायनिक खाद का खर्चा घटा सकते हैं। जैविक खाद खेती के लिए, पर्यावरण के लिए और यह सेहत के लिए भी बहुत ज्यादा फायदेमंद है। जबकि रासायनिक खाद से हर तरह से सिर्फ नुकसान होता है और खर्चा भी बढ़ता है।

पानी और मजदूरी कैसे बचाएं

कई ऐसे किसान है जिनके पास पानी की सुविधा नहीं है, और मजदूरी देने के लिए भी आर्थिक स्थिति से कमजोर है तो ऐसे में वह किसान मल्चिंग और ड्रिप का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक बार मल्चिंग करके दो से तीन फसल ले सकते हैं, और ड्रिप का इस्तेमाल करके 40 से 50%तक की पानी की बचत कर सकते हैं। सरकार छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को ड्रिप और मल्चिंग पर सब्सिडी देती है। जिससे यह आधे खर्चे में किसानों को मिल जाएंगे और इनका इस्तेमाल करके उत्पादन अधिक प्राप्त कर पाएंगे। फसल की जरूरत के अनुसार उन्हें पानी मिलेगा तथा अधिक पानी नहीं गिरेगा जिससे पानी कम लगेगा।

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मल्चिंग लगाकर खेत की मिट्टी में नमी बनाए रख सकते हैं, खरपतवार को उगने से रोक सकते हैं और उत्पादन बढ़ा सकते हैं। क्योंकि यह दोनों चीज खेती के लिए बहुत ही ज्यादा लाभकारी है। इसके अलावा अगर किसान किराए पर मशीन लेकर खेती करेंगे तो मजदूर की जरूरत कम पड़ेगी, मशीनों से काम समय पर होगा, किसान समूह बनाकर अगर कोई कृषि यंत्र लेते हैं तो उसकी लागत भी कम हो जाती है।

इन बातों का ध्यान रखें ध्यान मिट्टी होगी उपजाऊ

इन सब के अलावा किसान को फसल चक्र अपनाना चाहिए। स्थानीय जलवायु के अनुसार बीजों का चुनाव करना चाहिए। तथा मिट्टी की जांच भी करवानी चाहिए। मिट्टी का स्वास्थ्य कार्ड बनवाना चाहिए। जिससे उन्हें पता चलेगा कि खेत को खाद की कितनी जरूरत है उतनी मात्रा में खाद डालेंगे इससे यह खर्च भी बचेगा और जलवायु के अनुसार बीज का चयन करेंगे तो उत्पादन अधिक मिलेगा, फसल चक्र अपनाएंगे तो मिट्टी उपजाऊ होगी।

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