मक्का किसानों के लिए खुशखबरी, लॉन्च हुई नई स्कीम, अब नहीं गिरेगा भाव, MIP हुआ तय

On: Tuesday, January 6, 2026 11:19 AM
मक्का की मार्केट इंटरवेंशन प्राइस क्या है

राज्य सरकार ने मक्का किसानों को राहत देते हुए MIP घोषित किया है, जिससे किसानों को अब इससे कम दाम नहीं मिलेगा। आइए जानते हैं कैसे मिलेगा इसका लाभ।

मार्केट इंटरवेंशन स्कीम

मक्का की खेती कई राज्यों में की जाती है। मक्का का इस्तेमाल अब कई उत्पादों में किया जाता है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिल जाती है। लेकिन जब बाजार में कीमत गिरती है, तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक राज्य सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 के लिए मक्का किसानों के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत रेट घटने पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। आइए जानते हैं मक्का का एमआईपी कितना घोषित किया गया है।

मक्का की मार्केट इंटरवेंशन प्राइस क्या है

मक्का किसानों को घोषित मार्केट इंटरवेंशन प्राइस का लाभ मिलेगा, जिससे कीमत घटने पर उन्हें नुकसान नहीं होगा। कर्नाटक राज्य सरकार ने मक्का का 2150 रुपये प्रति क्विंटल मार्केट इंटरवेंशन प्राइस तय किया है। यदि बाजार भाव इससे कम होता है, तो किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। आइए समझते हैं यह योजना किस तरह काम करेगी।

मक्का किसानों को मुआवजा कैसे मिलेगा

अगर मक्का के दाम बाजार में गिर जाते हैं और किसान मुआवजा लेना चाहते हैं, तो इसके लिए तय प्रक्रिया अपनानी होगी। इस योजना के अंतर्गत अधिसूचित APMCऔर उप-बाजार यार्ड में यूनिफाइड मार्केट प्लेटफॉर्म (UMP) के द्वारा चार लाख टन तक मक्का के लेनदेन का निर्णय लिया गया है। इसमें औसत मॉडल कीमत 1900 रुपये प्रति क्विंटल को आधार माना गया है। यदि किसान इससे कम भाव पर मक्का बेचते हैं, तो उन्हें 250 रुपये प्रति क्विंटल तक मुआवजा दिया जाएगा।

अगर बाजार में कीमत 2150 रुपये प्रति क्विंटल या उससे ज्यादा रहती है, तो इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। एक किसान अधिकतम 50 क्विंटल तक इस योजना का फायदा ले सकता है। बताया गया है कि यह योजना FRUITS सॉफ्टवेयर में भूमि जोत के विवरण के अधीन लागू होगी, जो 12 क्विंटल तक सीमित है। इसमें किसानों को अधिक फायदा देखने को मिल रहा है।

किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए पंजीकरण कराना होगा। बताया जा रहा है कि NeMLप्लेटफॉर्म के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करके किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, और फिर डीबीटी के जरिए उनके खाते में भुगतान किया जाएगा।

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