किसानों को प्रति एकड़ 12 लाख रुपए से ज्यादा का मुनाफा देती है इस मसाले की खेती, हर घर में प्रतिदिन रहती है डिमांड, जानिए उत्पादन और कीमत

On: Sunday, November 30, 2025 8:00 AM
मसाले की खेती

इस मसाले की खेती करके किसान पारंपरिक फसल जैसे गेहूं और धान की तुलना में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। आइए जानते हैं किन राज्यों में यह फसल उगाई जाती है।

मसाले की खेती

हमारे देश में कई तरह के मसालों की खेती की जाती है, जिनसे किसानों को अच्छा फायदा मिलता है। इनमें हल्दी भी एक मसाला है। इसका इस्तेमाल कई तरीकों से होता है। हर घर में रोजाना मसाले के तौर पर हल्दी का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा जड़ी-बूटी के रूप में इसके औषधीय लाभ भी हैं। इसे कच्चे, सूखे और पाउडर रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी की खेती कई राज्यों में की जाती है जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, सिक्किम, मिजोरम, मध्य प्रदेश, मेघालय और केरल।

महाराष्ट्र के सांगली जिले के किसान हल्दी की बहुत अच्छी कीमत प्राप्त कर पाते हैं, क्योंकि यहां की हल्दी की गुणवत्ता और स्वाद बेहतरीन होता है। सांगली की हल्दी को 2019 में जीआई टैग भी मिला हुआ है। यहां किसानों को हल्दी की कीमत ₹8,000 से ₹15,000 प्रति क्विंटल तक मिलती है। यदि हल्दी की गुणवत्ता बहुत अच्छी हो, तो इसकी कीमत ₹10,000 से ₹23,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच जाती है। आईए जानते हैं हल्दी की खेती कब की जाती है, कितना समय लगाता है और एक एकड़ में कितना उत्पादन मिलता है।

हल्दी की खेती का समय

हल्दी की खेती अप्रैल से जुलाई के बीच की जाती है। मानसून की पहली बारिश के बाद किसान इसकी बुवाई करते हैं। यह फसल 7 से 9 महीने में तैयार हो जाती है। फसल तैयार होने के बाद जमीन को जोतकर पौधों को हाथ से या फिर ट्रैक्टर की मदद से खोदकर प्रखंड (राइजोम) निकाले जाते हैं। जब पत्तियां सूखने लगती हैं और पीली पड़ जाती हैं, तभी कटाई का सही समय माना जाता है।

हल्दी की खेती में कितना उत्पादन मिलता है

यदि किसान 1 एकड़ में हल्दी की खेती करते हैं, तो उन्हें 160 से 220 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि किसान कौन-सी वैरायटी की खेती कर रहे हैं। महाराष्ट्र के सांगली जिले के किसान ‘राजापुरी’ नाम की हल्दी की वैरायटी की खेती करते हैं, जिसमें करक्यूमिन लेवल 5 से 7 प्रतिशत तक होता है, और इसी कारण इसकी बाजार में बहुत अच्छी कीमत मिलती है। किसान एक एकड़ में मिलने वाले उत्पादन और प्रति क्विंटल मिल रही कीमत से मुनाफे का अंदाजा लगा सकते है।

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