फसल के पत्ते बताएंगे कितनी यूरिया खाद चाहिए, जानिए क्या है लीफ कलर चार्ट, जिससे उत्पादन बढ़ेगा, खर्चा कटेगा

On: Friday, September 19, 2025 3:00 PM
लीफ कलर चार्ट को इस्तेमाल

किसानों को अब जरूरत से ज्यादा खेतों में खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फसल खुद बता देगी कि कितनी खाद मुझे चाहिए। चलिए, बताते हैं लीफ कलर चार्ट के बारे में।

खेत में सही मात्रा में डालिए खाद

किसान अगर खेत में जरूरत से ज्यादा मात्रा में यूरिया डाल देते हैं, तो इससे नुकसान होता है। मिट्टी खराब होती है, फसल की गुणवत्ता में कमी आती है, पौधे भी कमजोर होते हैं, कीटों की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। कुल मिलाकर किसानों को नुकसान पर नुकसान होता है। इसलिए किसानों को सही मात्रा में यूरिया खाद डालनी चाहिए।

लेकिन यह पता कैसे चले कि कितनी मात्रा में खाद डालें? फसल को कितनी मात्रा में खाद की जरूरत है? तो चलिए, इसके लिए एक वैज्ञानिक तकनीक बताते हैं, जो कि आसानी से किसानों को मिल सकती है।

लीफ कलर चार्ट

लीफ कलर चार्ट (Leaf Color Chart – LCC) का किसान इस्तेमाल कर सकते हैं। यह बताता है कि फसल को कितनी मात्रा में नाइट्रोजन की जरूरत होती है। दरअसल, यह कागज का एक चार्ट होता है जिसमें करीब 6 हरे रंग के शेड होते हैं, यानी कि हरे रंग की 6 फोटो लगी होती हैं, कोई गहरा रंग होता है, तो कोई हल्का। फिर फसल की पत्तियों से इस रंग को मिलाया जाता है।

जो भी रंग आपकी फसल से मिलता है, उसके हिसाब से फसल को यूरिया खाद देनी पड़ती है। इसी से किसान को अनावश्यक, यानी कि जरूरत से ज्यादा खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे खाद का खर्चा बचता है, लागत में कमी आ जाती है, और उत्पादन अधिक होता है, क्योंकि फसल को जरूरत के हिसाब से यूरिया खाद मिल रही है। वहीं, पर्यावरण संरक्षण भी होगा, मिट्टी खराब नहीं होगी।

कहां मिलेगा लीफ कलर चार्ट

लीफ कलर चार्ट को इस्तेमाल करने के लिए किसानों को सुबह 8 से 10 बजे के बीच का समय चुनना चाहिए। उसके बाद पौधे की पत्तियों को लेना चाहिए, जिसमें किसी तरह का रोग न लगा हो। किसान अगर यह लीफ कलर चार्ट कम दाम में या फ्री में लेना चाहते हैं, तो कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग में संपर्क कर सकते हैं। कई राज्य ऐसे हैं जहां के कृषी विश्वविद्यालय में, कृषि विभाग में यह किसानों को उपलब्ध कराया जाता है।

कहीं-कहीं कुछ कीमत ली जाती है, कुछ जगहों पर किसानों की भलाई को देखते हुए मुफ्त में भी दिया जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र में किसान इसे पता कर सकते हैं। इसके अलावा, सरकारी विभागों, एजेंसियों या सरकारी पोर्टल पर भी देख सकते हैं।

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