सरसों की खेती करते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान, तेल की मात्रा होगी ज्यादा, कीट-रोग की समस्या भी नहीं आएगी

On: Thursday, September 18, 2025 6:00 PM
सरसों की खेती का समय

सरसों के किसानों को तीन मुख्य बातों की जानकारी होनी चाहिए। तो चलिए इस लेख के माध्यम से जानते हैं, सरसों की खेती से ज्यादा फायदा लेने का तरीका।

सरसों की खेती का समय

इस लेख में सरसों की खेती से जुड़ी तीन मुख्य बातों की जानकारी हम लेने जा रहे हैं। जिसमें सबसे पहले हम खेती के सही समय की बात करेंगे। सरसों की खेती सही समय पर करना जरूरी होता है। अगर इसकी बुवाई करने में देरी हो जाती है, तो कीट व रोग की समस्या अधिक होती है, जिससे किसान को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरसों की बुवाई का सही समय 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर के बीच का माना जाता है। इस समय खेती करने पर किसान फायदे में रहते हैं।

सरसों की फसल के लिए खाद

सरसों की बुवाई से पहले, खेत तैयार करते समय गोबर की खाद या फिर वर्मी कम्पोस्ट खेतों में डालनी चाहिए। इसके अलावा रासायनिक खाद भी किसान इस्तेमाल करते हैं। यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि खाद में सल्फर (Sulfur) जरूर मिलाना चाहिए। अगर खाद में सल्फर दिया जाए, तो सरसों में तेल की मात्रा अधिक होती है, चमक भी आती है और जड़ों का विकास बेहतर होता है। इससे फसल अंत तक मजबूत बनी रहती है। ऐसे बीज चमकदार होते हैं और उनमें तेल भी अधिक होता है।

बीज के चुनाव में रखें ये दो बातें ध्यान

सरसों के बीजों का चुनाव करते समय किसानों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जिसमें सबसे पहले, सही किस्म का चुनाव करें। ऐसी किस्में चुनें जिनमें तेल की मात्रा अधिक हो और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर हो।

कुछ प्रमुख अच्छी किस्में हैं- पूसा ज्वालामुखी, आरएलएम 619, एनआरसीडीआर 601 आदि। इसके अलावा, किसान को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी आदि की जानकारी होनी चाहिए। यदि मिट्टी की जांच करवा ली जाए, तो और भी बेहतर होगा। उसके अनुसार खाद का सही उपयोग किया जा सकेगा।

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