जनवरी में लगाएं यह एक सब्जी, 45 दिन में होगी फसल तैयार, मुनाफा देख फटी रह जाएंगी पड़ोसी किसान की आंखें

On: Monday, January 5, 2026 2:00 PM
जनवरी में देसी टिंडा की खेती

जनवरी में अगर कम समय में तैयार होने वाली, छोटी अवधि की सब्जी लगाना चाहते हैं, जिसमें खर्चा भी कम आए, तो आइए जानते हैं एक ऐसी सब्जी के बारे में।

जनवरी में देसी टिंडा की खेती

जनवरी के पूरे महीने में या फरवरी की शुरुआत तक देसी टिंडा की खेती की जा सकती है। यदि जनवरी के पहले सप्ताह में इसकी बुवाई कर दी जाए, तो किसानों को ज्यादा मुनाफा मिलता है, क्योंकि इस समय मंडी भाव ₹60 प्रति किलो तक भी मिल सकते हैं। देसी टिंडा की फसल 45 से 50 दिन में तैयार हो जाती है और कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है। औसतन बाद में भी इसका भाव ₹30 से ₹40 प्रति किलो तक मिल जाता है।

इस फसल का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें रोग-बीमारी पर ज्यादा खर्च नहीं आता। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है और धूप तेज होती है, तब भी इससे फसल को ज्यादा नुकसान नहीं होता। उस समय भी किसानों को अच्छा उत्पादन मिलता है। मंडियों में इसकी आवक सीमित रहती है, जिसके कारण किसान इसकी खेती से अधिक आमदनी प्राप्त कर पाते हैं। इसलिए अभी देसी टिंडा की खेती करना फायदे का सौदा है। आइए जानते हैं इसकी बढ़िया वैरायटी और लगाने का तरीका।

देसी टिंडा की बढ़िया वैरायटी

किसी भी सब्जी की खेती करते समय किसानों को अपने क्षेत्र के अनुसार वैरायटी का चयन करना चाहिए। मंडी में मांग वाली वैरायटी चुनना ज्यादा फायदेमंद रहता है। इसके अलावा कुछ देसी वैरायटी भी बहुत अच्छी होती हैं, जैसे सागर सीड्स की नरेश टिंडा, नामधारी टिंडा और ईस्ट-वेस्ट की भठिंडा वैरायटी। ये वैरायटी ऑनलाइन भी उपलब्ध होती हैं और नजदीकी बीज भंडार से भी खरीदी जा सकती हैं।

देसी टिंडा की खेती कैसे करें

अगर देसी टिंडा की खेती से ज्यादा मुनाफा लेना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इस समय तापमान कम होने के कारण बीजों को अंकुरित होने में थोड़ा समय लग सकता है। इसलिए बीज बोने से पहले उन्हें 12 से 24 घंटे तक गुनगुने पानी में भिगोकर रखें, उसके बाद बुवाई करें।

खरपतवार और रोग-बीमारी से फसल को बचाने के लिए प्लास्टिक मल्च का इस्तेमाल किया जा सकता है। बुवाई के बाद पहली सिंचाई तभी करें, जब बीज प्रतिशत तक अंकुरण हो जाए। इसके 2 से 3 दिन बाद अगली सिंचाई करें।

खेत की तैयारी करते समय सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर डालें। यदि रासायनिक खाद डालते हैं, तो डीएपी, एमओपी और यूरिया का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करें। खेत की मिट्टी को भुरभुरी बनाने के बाद 5 फीट की दूरी पर बेड बनाएं और 1 फीट की दूरी पर बीज की बुवाई करें। इससे फसल का विकास अच्छा होता है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।

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