बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश और आपदाओं के बीच किसान कैसे करें नुकसान की भरपाई, जानिए पूरी जानकारी इस लेख में।
जलवायु परिवर्तन का खेती पर असर: सम्पूर्ण जानकारी
खेती भारतीय किसानों की जीवनरेखा है। लेकिन आज सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन की है। बढ़ते तापमान, अनियमित बारिश और प्राकृतिक आपदाएं खेती को प्रभावित कर रही हैं। इससे न केवल फसल की पैदावार घट रही है बल्कि किसानों की आमदनी पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
खेती पर कैसे असर डाल रहा है जलवायु परिवर्तन
- अनियमित बारिश: पहले जहां बारिश समय पर और संतुलित होती थी, अब कभी बहुत ज्यादा तो कभी बहुत कम बारिश हो रही है। खरीफ की फसलें जैसे धान, मक्का और सोयाबीन सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।
- बढ़ता तापमान: गर्मी बढ़ने से गेहूं, सरसों और दलहनों की पैदावार घट रही है। तापमान बढ़ने पर पौधों का विकास धीमा होता है और उत्पादन कम हो जाता है।
- बाढ़ और सूखा: एक तरफ बाढ़ से खेत डूब जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ सूखे से फसलें सूख जाती हैं। इससे किसान को भारी नुकसान होता है।
- कीट और रोग का बढ़ना: जलवायु असंतुलन से कीट और रोग तेजी से फैलते हैं। इससे दवाइयों और कीटनाशकों पर खर्च बढ़ जाता है।
कमाई पर असर
सामान्य परिस्थितियों में किसान खरीफ या रबी सीजन में प्रति एकड़ 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पादन में 20 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा रही है। यदि बारिश कम होती है तो धान जैसी फसलों की पैदावार आधी रह जाती है। इसी तरह अधिक तापमान गेहूं की पैदावार 15 से 20 प्रतिशत तक घटा देता है। नतीजा यह होता है कि किसान की कमाई घटकर 20 से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ तक सीमित रह जाती है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय
- फसल विविधिकरण: एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय किसान को कई फसलों की खेती करनी चाहिए। इससे किसी एक फसल के खराब होने पर दूसरी से नुकसान की भरपाई हो सकती है।
- जल संरक्षण: वर्षा जल संग्रहण, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से पानी की बचत होती है और सूखे में मदद मिलती है।
- मौसम आधारित खेती: कृषि विभाग और मौसम विभाग की जानकारी लेकर किसान बोआई और कटाई का समय बदल सकते हैं।
- सहनशील किस्में: वैज्ञानिकों ने बाढ़ और सूखा सहन करने वाली किस्में विकसित की हैं। जैसे बाढ़ सहनशील धान या सूखा सहनशील ज्वार और बाजरा।
- फसल बीमा योजना: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़कर किसान प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई पा सकते हैं।
निष्कर्ष
जलवायु परिवर्तन खेती के लिए गंभीर चुनौती है। लेकिन सही योजना, तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। फसल विविधिकरण, जल संरक्षण और बीमा जैसी रणनीतियां किसानों को स्थिर आय दिलाने में मदद करती हैं। जागरूकता और तैयारी से किसान जलवायु परिवर्तन के असर को झेलते हुए भी अपनी खेती और कमाई को सुरक्षित रख सकते हैं।
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