केला की फसल में अगर चित्ती रोग लग जाए, तो फसल पूरी तरह से खराब होने लगती है। उत्पादन में भारी गिरावट आती है। पत्तियों के साथ-साथ फलों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। तो चलिए जानते हैं इसका उपाय।
केले की फसल में चित्ती रोग
केले की खेती करने वाले पुराने किसानों को केले में लगने वाले चित्ती रोग की जानकारी होती है, लेकिन जिन किसानों ने हाल ही में केले की खेती शुरू की है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है तो बता दें कि चित्ती रोग को सिगाटोका रोग भी कहा जाता है। यह एक खतरनाक रोग है, जो फसल और फल दोनों को प्रभावित करता है। इससे केले की खेती में किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं इसके लक्षण और बचाव के उपाय।

चित्ती रोग के लक्षण
केले की फसल में अगर चित्ती रोग लग जाए, तो इसके लक्षण पत्तियों को देखकर पहचान सकते हैं। पत्तियों पर धब्बे दिखाई देने लगते हैं, और वे चमकदार नहीं लगतीं। शुरुआत में केले के पेड़ की तीसरी और चौथी पत्ती पर चित्ती के निशान दिखाई देते हैं। इसके बाद ये धब्बे पीले और हरे रंग की धारियों में भी नजर आने लगते हैं। धब्बों का आकार धीरे-धीरे बढ़ता जाता है, और ये भूरे रंग के बड़े-बड़े पैच में तब्दील हो जाते हैं। इस रोग से ग्रसित फलों को अधिक समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता वे जल्दी खराब हो जाते हैं।

चित्ती रोग से फसल बचाने के उपाय
अगर चित्ती रोग से केले की फसल को बचाना चाहते हैं, तो सबसे पहले बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह से सफाई करनी चाहिए। रोपाई के बाद मिट्टी में धूप हवा लगने देना चाहिए और पुरानी फसल के अवशेषों का उचित प्रबंधन करना चाहिए। जिस खेत में पहले यह रोग लगा हो, वहां के कंद का इस्तेमाल करने से फिर से यह रोग फैल सकता है।
यदि फसल में चित्ती रोग लग जाए, तो इसके लिए हर 15 दिन के अंतराल पर 250 ग्राम बेनलेट को प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इससे रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।
इसके अलावा फाइटोलान, क्यूपरामार, ब्लू कपर, या ब्लाइटॉक्स-50 का 0.3 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करें। जिसमें एक हेक्टेयर में लगभग 1000 लीटर घोल का छिड़काव किया जाता है। इस घोल में 2 प्रतिशत अलसी का तेल मिला देने से दवा केले की चिकनी पत्तियों पर बेहतर चिपकती है।
साथ ही इस रोग के लिए डाइथेन एम-45 (0.2 प्रतिशत) और बेनलेट (0.1 प्रतिशत) का भी छिड़काव किया जा सकता है। इन दवाओं की 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग किया जाता है, जिससे अच्छा असर देखने को मिलता है।
नोट– यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स से ली गई है। कृपया किसी भी दवा का इस्तेमाल करने से पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
यह भी पढ़े- ₹130 का जुगाड़ सब्जी-फल के किसानों के लिए वरदान, कीट विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने बनाया कमाल का ट्रैप

नमस्ते, मैं निकिता सिंह । मैं 3 साल से पत्रकारिता कर रही हूं । मुझे खेती-किसानी के विषय में विशेषज्ञता प्राप्त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी तरो ताजा खबरें बताउंगी। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको ‘काम की खबर’ दे सकूं । जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप https://khetitalks.com के साथ जुड़े रहिए । धन्यवाद












