खेत में पानी भरने से बचाने के लिए कई उपाय कर सकते हैं, जिनसे फसल नहीं डूबेगी, उत्पादन अधिक मिलेगा और मिट्टी उपजाऊ होगी।
खेत में पानी भरने से कैसे रोकें?
किसान भाइयों, अगर खेत में पानी भर जाता है तो फसल खराब हो जाती है और मिट्टी की उर्वरता भी घट जाती है। तो चलिए आपको बताते हैं खेत में पानी भरने से कैसे रोक सकते हैं।
- जल निकासी की व्यवस्था करें- खेत के मेड़ों और किनारों पर नालियाँ बनाकर रखें, जिससे खेत का ज्यादा पानी बाहर निकल जाए। साथ ही खेत को हल्का ढलानदार रखें। अगर आपके क्षेत्र में ज्यादा पानी की समस्या है, तो यह बहुत जरूरी है।
- नाला और तालाब बनाएं- किसान नाला और तालाब बनाकर बारिश का पानी इकट्ठा कर सकते हैं। इससे बाद में सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और खेत में जलभराव भी नहीं होगा।

- फसल चक्र अपनाएं- किसान भाइयों को ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों और निचली जमीन में धान जैसी जलसहिष्णु फसलें लगानी चाहिए। वहीं, ऊँची जगह पर दलहन-तिलहन जैसी फसलें लगानी चाहिए।
- खेत का समतलीकरण करें- लेज़र लैंड लेवलर का इस्तेमाल करके खेत को समतल करें, जिससे पानी एक जगह इकट्ठा न हो और आसानी से बाहर निकल जाए।
- जल निकासी वाले पौधे लगाएं- खेत के किनारों पर नीम, अरहर और बांस के पौधे लगाएं, जो पानी के प्रभाव को बेहतर बनाते हैं।
- मिट्टी का सुधार करें- जैविक खाद का इस्तेमाल करें, जिससे मिट्टी भुरभुरी होगी और पानी जमीन के भीतर चला जाएगा। जैविक खाद के रूप में गोबर की खाद और कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है।
- ऊँची मेड़ बनाएं- खेत के चारों तरफ ऊँची मेड़ बनाएं, जिससे पानी को नियंत्रित किया जा सके और खेत में पानी घुसने से भी रोका जा सके।
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खेत में पानी भरने से कैसे रोकें?
किसान भाइयों, अगर खेत में पानी भर जाता है तो फसल खराब हो जाती है और मिट्टी की उर्वरता भी घट जाती है। तो चलिए आपको बताते हैं खेत में पानी भरने से कैसे रोक सकते हैं।
जल निकासी की व्यवस्था करें
खेत के मेड़ों और किनारों पर नालियाँ बनाकर रखें, जिससे खेत का ज्यादा पानी बाहर निकल जाए। साथ ही खेत को हल्का ढलानदार रखें। अगर आपके क्षेत्र में ज्यादा पानी की समस्या है, तो यह बहुत जरूरी है।
ऊँची मेड़ बनाएं
खेत के चारों तरफ ऊँची मेड़ बनाएं, जिससे पानी को नियंत्रित किया जा सके और खेत में पानी घुसने से भी रोका जा सके।
नाला और तालाब बनाएं
किसान नाला और तालाब बनाकर बारिश का पानी इकट्ठा कर सकते हैं। इससे बाद में सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और खेत में जलभराव भी नहीं होगा।
फसल चक्र अपनाएं
किसान भाइयों को ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों और निचली जमीन में धान जैसी जलसहिष्णु फसलें लगानी चाहिए। वहीं, ऊँची जगह पर दलहन-तिलहन जैसी फसलें लगानी चाहिए।
खेत का समतलीकरण करें
लेज़र लैंड लेवलर का इस्तेमाल करके खेत को समतल करें, जिससे पानी एक जगह इकट्ठा न हो और आसानी से बाहर निकल जाए।
जल निकासी वाले पौधे लगाएं
खेत के किनारों पर नीम, अरहर और बांस के पौधे लगाएं, जो पानी के प्रभाव को बेहतर बनाते हैं।
मिट्टी का सुधार करें
जैविक खाद का इस्तेमाल करें, जिससे मिट्टी भुरभुरी होगी और पानी जमीन के भीतर चला जाएगा। जैविक खाद के रूप में गोबर की खाद और कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है।

नमस्ते, मैं निकिता सिंह । मैं 3 साल से पत्रकारिता कर रही हूं । मुझे खेती-किसानी के विषय में विशेषज्ञता प्राप्त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी तरो ताजा खबरें बताउंगी। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको ‘काम की खबर’ दे सकूं । जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप https://khetitalks.com के साथ जुड़े रहिए । धन्यवाद












