लौकी की ज्यादा पैदावार देने वाली वैरायटी की तलाश में हैं तो चलिए, यहां आपको चार बेहतरीन किस्मों की जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारीयों द्वारा बताया गया है।
लौकी की खेती
लौकी की खेती में किसानों को अच्छा फायदा होता है। यदि जमीन उपजाऊ हो, तो बंपर उत्पादन मिलता है। बस अच्छी वैरायटी का चयन करना जरूरी है। लौकी सेहत के लिए फायदेमंद होती है और बाजार में हमेशा डिमांड में रहती है। इसकी खेती में कम खर्च में अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। बस एक बीमारी से फसल को बचा लिया जाए तो अच्छी कमाई हो सकती है। चलिए, अब आपको कुछ बेहतरीन किस्मों के बारे में जानकारी देते हैं।
लौकी की बढ़िया किस्में
लौकी की कई किस्में इस समय बाजार में उपलब्ध हैं। लेकिन किस्म का चयन अपने क्षेत्र की जमीन और मंडी की डिमांड के अनुसार ही करना चाहिए। अगर किसान के खेत की मिट्टी दोमट या काली है, तो ऐसे में लौकी की खेती से अच्छा उत्पादन मिल सकता है।
- इसमें पूसा हाइब्रिड, काशी उज्जवल या फिर पूसा अलंकार का चयन किया जा सकता है। ये तीनों किस्में अच्छा उत्पादन देती हैं। इन वैरायटियों की खास बात यह है कि पानी का ज्यादा प्रभाव इन पर नहीं पड़ता। अगर आगे चलकर बारिश हो भी जाती है, तब भी किसानों को नुकसान नहीं होगा।
- इसके अलावा, किसान सम्राट वैरायटी का चयन कर सकते हैं। अक्टूबर में सम्राट वैरायटी लगाकर किसान एक एकड़ से 180 क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं। यह किस्म 150 से 180 दिन में तैयार हो जाती है। सम्राट किस्म को लौकी की ज्यादा उत्पादन देने वाली वैरायटी के रूप में जानी जाती है।

लौकी की खेती का समय और तरीका
लौकी की खेती इस समय, यानी कि अक्टूबर में की जा सकती है। इसकी खेती के लिए अनुकूल तापमान 24 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। किसानों को समय के अनुसार ही वैरायटी का चयन करना चाहिए।
खेत की तैयारी करते समय गोबर की खाद और नीम की खली ज़रूर मिलाएं। एक एकड़ खेत के लिए लगभग 500 से 800 ग्राम बीजों की जरूरत होती है। बीजों को 1 से 2 सेंटीमीटर गहराई में बोएं। पहले ट्रे में पौधों की नर्सरी तैयार कर सकते हैं, उसके बाद रोपाई करें।
लौकी की खेती उन जगहों पर करें जहाँ पर बढ़िया धूप आती हो। साथ ही यह ध्यान रखें कि जब पौधे में 5 से 7 पत्तियाँ आ जाएं, तो ऊपर के हिस्से को पिंच कर दें (यानी काट दें)। इससे पौधा घना होगा और उत्पादन ज्यादा मिलेगा।
साथ ही समय-समय पर कीटनाशक का इस्तेमाल करें। जैविक कीटनाशक का उपयोग करना बेहतर रहेगा। आप चूल्हे की राख का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जिससे कीड़े नहीं लगेंगे। क्योंकि लौकी में कीड़े लगने से दाग पड़ जाते हैं और ऐसे में किसानों को बाजार में कम कीमत मिलती है।

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