गेहूं की फसल में चौड़ी पत्ती खरपतवार हो गए हैं? तो 12 ग्राम यह दवा पानी में मिलाकर स्प्रे करें, एक हफ्ते में खरपतवार नष्ट हो जाएगी

On: Tuesday, December 16, 2025 9:00 AM
गेहूं की फसल में खरपतवार होने के नुकसान

गेहूं के खेतों में अगर चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार हो जाते हैं, तो उत्पादन कम हो सकता है। खाद और पानी का बड़ा हिस्सा खरपतवार ही ले लेते हैं। आइए जानते हैं कि इन्हें सही तरीके से कैसे हटाया जाए।

गेहूं की फसल में खरपतवार होने के नुकसान

जब किसान गेहूं की फसल में पहली सिंचाई कर देते हैं, उसके बाद अच्छी पैदावार के लिए यूरिया और जिंक सल्फेट का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन सिंचाई के बाद खेतों में खरपतवार उगने लगते हैं, जो मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। अगर खरपतवार लंबे समय तक खेत में बने रहते हैं, तो आप जो भी खाद और पानी देते हैं, उसका आधा हिस्सा खरपतवार ही ले लेते हैं। इससे किसानों को नुकसान होता है और खाद पर किया गया खर्च सही परिणाम नहीं देता। इसलिए खरपतवार को समय पर निकालना बहुत जरूरी होता है।

हालांकि, एक-एक खरपतवार को हाथ से निकालना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में दवा का छिड़काव एक अच्छा विकल्प है। यहां पर गेहूं की फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए प्रभावी दवा के बारे में बताया जा रहा है। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार में गाजर घास, बथुआ आदि शामिल होते हैं। जब ये खरपतवार दो से तीन पत्तियों की अवस्था में हों, तभी नियंत्रण के लिए दवा का छिड़काव करना चाहिए। अगर सिंचाई के बाद खेत में पैर रखने पर मिट्टी नहीं दब रही है, तो यह स्प्रे करने का सही समय होता है।

गेहूं की फसल में खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए कौन-सा स्प्रे करें

अगर गेहूं की फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार हैं, तो मात्र 50 से 70 रुपये खर्च करके एक एकड़ की फसल को बचा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार को खत्म करने के लिए Metsulfuron methyle 20% wg खरपतवारनाशी दवा का उपयोग किया जा सकता है। इस दवा के लगभग 12 ग्राम को 150 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ में स्प्रे करें। चाहें तो इस घोल में 1 से 2 किलो यूरिया भी मिला सकते हैं। यह अनिवार्य नहीं है लेकिन मिलाने से अधिक फायदा मिलता है।

स्प्रे करने के 5 से 7 दिन के अंदर खरपतवार नष्ट होने लगते हैं। इसके साथ ही पौधों में क्लोरोफिल की मात्रा बढ़ती है। क्लोरोफिल बढ़ने से प्रकाश संश्लेषण तेज होता है, जिससे पौधों को अधिक ऊर्जा मिलती है। अगर फसल की पत्तियां पीली पड़ रही हों, तो वे फिर से हरी होने लगती हैं। पौधे स्वस्थ और हरे-भरे रहते हैं। अंतत उत्पादन बढ़ता है, गुणवत्ता बेहतर होती है, अनाज में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और दानों का आकार भी अच्छा होता है।

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