गोबर में छिपा सोना, फ्री की गैस, फ्री की खाद और कमाई अलग से, जानिये गोबर गैस संयंत्र और जैविक खाद उत्पादन की सम्पूर्ण जानकारी

On: Friday, September 12, 2025 9:00 AM
गोबर गैस संयंत्र और जैविक खाद उत्पादन

गोबर गैस संयंत्र और जैविक खाद उत्पादन की पूरी जानकारी और किसानों को होने वाला लाभ और कमाई के अवसर भी बताये गए है-

गोबर गैस संयंत्र और जैविक खाद उत्पादन

गांव और खेती से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है गोबर। पहले गोबर को सिर्फ कंडे या खाद के रूप में उपयोग किया जाता था, लेकिन आज यह ऊर्जा और जैविक खाद दोनों का बड़ा स्रोत बन गया है। गोबर गैस संयंत्र और जैविक खाद उत्पादन से किसान अपनी जरूरत की ऊर्जा पूरी कर सकते हैं और अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकते हैं।

गोबर गैस संयंत्र क्या है?

गोबर गैस संयंत्र एक ऐसी तकनीक है जिसमें गाय, भैंस या अन्य पशुओं के गोबर को विशेष टैंक में भरकर गैस तैयार की जाती है। इस गैस को खाना बनाने, बिजली बनाने और छोटे उद्योग चलाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। गैस तैयार होने के बाद बचा हुआ अवशेष खेतों में जैविक खाद के रूप में उपयोग होता है।

गोबर गैस संयंत्र के फायदे

  1. ऊर्जा का स्रोत: इससे तैयार गैस का उपयोग रसोई गैस की तरह किया जा सकता है।
  2. पैसे की बचत: गैस से घरेलू और खेती से जुड़े काम होते हैं जिससे एलपीजी और डीजल का खर्च घटता है।
  3. जैविक खाद: गैस निकालने के बाद बचा अवशेष खेतों के लिए उच्च गुणवत्ता की खाद बन जाता है।
  4. पर्यावरण अनुकूल: इससे प्रदूषण कम होता है और मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है।
  5. कचरे का प्रबंधन: गोबर और अन्य जैविक कचरे का सही उपयोग हो जाता है।

जैविक खाद उत्पादन

गोबर गैस संयंत्र से निकलने वाला स्लरी (तरल अवशेष) खेतों के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसे सुखाकर या सीधे खेतों में डालकर जैविक खाद बनाई जाती है। यह खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और फसल की गुणवत्ता सुधारती है।

लागत और सरकारी मदद

एक छोटे स्तर का गोबर गैस संयंत्र 25 से 50 हजार रुपये की लागत में तैयार हो जाता है। बड़े स्तर पर यह लागत 1 से 2 लाख रुपये तक जा सकती है। सरकार और नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की ओर से किसानों को सब्सिडी दी जाती है, जिससे लागत का 30 से 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

कमाई का अनुमान

  1. गैस से बचत: यदि एक किसान के पास 5 से 6 पशु हैं तो रोजाना 2 से 3 क्यूबिक मीटर गैस तैयार हो सकती है। इससे एक परिवार का खाना बनाने का काम आसानी से हो जाता है और सालाना 8 से 10 हजार रुपये की एलपीजी की बचत होती है।
  2. जैविक खाद की कमाई: एक छोटे संयंत्र से सालाना 3 से 4 टन जैविक खाद मिलती है। बाजार में इसकी कीमत 4 से 6 रुपये प्रति किलो तक होती है। इस तरह सालाना 15 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है।
  3. बड़े स्तर पर उत्पादन: यदि कोई किसान 10 से 15 पशुओं के लिए संयंत्र लगाता है तो गैस का उपयोग छोटे व्यावसायिक कामों में किया जा सकता है और खाद बेचकर 50 से 60 हजार रुपये तक की कमाई संभव है।

भविष्य की संभावनाएं

जैविक खाद की मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। साथ ही गोबर गैस से गांवों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता आ सकती है। आने वाले समय में यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा साधन बनेगा।

निष्कर्ष

गोबर गैस संयंत्र और जैविक खाद उत्पादन किसानों के लिए दोहरा फायदा देता है। एक तरफ यह ऊर्जा की जरूरत पूरी करता है तो दूसरी तरफ अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बनता है। यदि किसान सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ उठाकर इसे अपनाएं तो वे खर्च घटाकर स्थायी कमाई का रास्ता खोल सकते हैं।

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