आलू की खेती सितंबर–अक्टूबर में कई किसान करते हैं। इसलिए आज हम जानेंगे कि ऑटोमेटिक आलू प्लांटर किस तरीके से काम करती है और इसे कहां से खरीदा जा सकता है।
आलू बोने का समय
आलू बोने का समय शुरू हो चुका है। जो किसान आलू की अगेती खेती करते हैं, वे 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच आलू की बुवाई करते हैं। इसके साथ ही अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य तक भी आलू की बुवाई होती है। इसके लिए पहले खेत की तैयारी करनी पड़ती है। खेत की तैयारी के बाद उसमें खाद मिलाई जाती है और फिर आलू लगाए जाते हैं।
आलू की खेती में फायदा तो है क्योंकि पूरे साल इसकी डिमांड रहती है। किसान इसे लंबे समय तक स्टोर कर पाते हैं। लेकिन इसमें खर्च भी आता है, जैसे खेतों में आलू लगाने का और फिर आलू की खुदाई करने का। ऐसे में अगर किसान ऑटोमेटिक आलू प्लांटर मशीन का इस्तेमाल कर लेते हैं तो इसमें उनको फायदा हो सकता है। तो चलिए, यहां पर बताते हैं इसकी खासियत।
ऑटोमेटिक आलू प्लांटर
नीचे दिए गए बिंदुओं के अनुसार ऑटोमेटिक आलू प्लांटर की खासियत जानें—
- ऑटोमेटिक आलू प्लांटर मशीन में स्पेशल गियर बॉक्स मिलता है, जिससे आलू के बीज की दूरी 4 से 7 इंच तक सेट कर सकते हैं।
- इसमें छोटे-बड़े सभी तरह के आलू की बुवाई के लिए अलग-अलग कटोरी मिलती है। इनमें बारीक और बड़े आलू की बुवाई की जा सकती है।
- अगर कटोरी में डबल आलू चला जाता है तो उसके लिए वाइब्रेटर लगा है, जो दूसरे आलू को पेटी में गिरा देता है।
- इसमें एक और वाइब्रेटर होता है, जो पेटी से आलू को चिपकने नहीं देता और अलग कर देता है।
- आलू की बुवाई अगर आप बेड बनाकर 23 से 27 इंच की बीच की
- दूरी पर करना चाहते हैं, तो इसका भी ऑप्शन मिलता है।
- यह मशीन मजबूत लोहे से बनी है तथा कई जगहों पर प्लास्टिक का इस्तेमाल हुआ है, जिससे जंग की समस्या नहीं आती।

ऑटोमेटिक आलू प्लांटर से बुवाई में कितना समय लगेगा?
अगर आलू की बुवाई ऑटोमेटिक आलू प्लांटर से की जाती है, तो डेढ़ से दो बीघा खेत में 1 घंटे के भीतर बुवाई हो सकती है। यानी यह मशीन जल्दी काम करती है। ऑटोमेटिक आलू प्लांटर मशीन की मदद से किसान मजदूरों की समस्या से राहत पा सकते हैं। इसके साथ ही समय पर, सही तरीके से और सही विधि से बुवाई कर सकते हैं, जिससे उत्पादन भी अच्छा मिलेगा।
किसान इस मशीन को लेने के लिए श्री बालाजी एग्रो ऑटोमेटिक मशीन से संपर्क कर सकते हैं। चित्र में दिए गए नंबर पर भी जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा अपने आसपास के क्षेत्र में, जहां कृषि यंत्र मिलते हैं, वहां पर भी जाकर देख सकते हैं।
कोई भी कृषि यंत्र लेने से पहले किसानों को कई जगह से उसकी जानकारी लेनी चाहिए और साथ ही कृषि विभाग में सब्सिडी के बारे में भी पता करना चाहिए।

नमस्ते, मैं निकिता सिंह । मैं 3 साल से पत्रकारिता कर रही हूं । मुझे खेती-किसानी के विषय में विशेषज्ञता प्राप्त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी तरो ताजा खबरें बताउंगी। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको ‘काम की खबर’ दे सकूं । जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप https://khetitalks.com के साथ जुड़े रहिए । धन्यवाद













