इन किसानों ने खाद खरीदना छोड़ा, खुद घर पर 15 दिन में बनाते हैं केमिकल फ्री खाद, ₹1 नहीं लगता, उत्पादन जबरदस्त, कमाई ताबड़तोड़

On: Friday, September 19, 2025 2:19 PM
किसान 15 दिन में बनाते हैं केमिकल फ्री खाद

किसान अगर खाद का पैसा और पर्यावरण प्रदूषित होने से बचाना चाहते हैं, तो चलिए बताते हैं जैविक खाद कैसे घर पर फ्री में तैयार करें। धान, गेहूं, सब्जी आदि फसलों की खेती करें।

इन किसानों ने खाद खरीदना छोड़ दिया

एक अच्छी फसल लेने के लिए किसानों को कई बार खेतों में खाद डालना पड़ता है। खेत की तैयारी करते समय, फसल के बढ़वार के समय कई बार किसान खाद देते हैं। ऐसे में बहुत सारा खर्चा बैठ जाता है, लेकिन यह जरूरी होता है। इसलिए किसान भाइयों को यहां पर एक फ्री का उपाय बताने जा रहे हैं, जिससे वे घर पर खाद तैयार कर सकते हैं, वह भी 15 दिन के भीतर। इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होगा, जिससे न मिट्टी खराब होगी, न अनाज से बीमारी फैलेगी और न ही पर्यावरण में प्रदूषण होगा।

तो चलिए बताते हैं जैविक खाद कैसे तैयार करें, जिससे बाजार से खाद खरीदने की जरूरत न पड़े। क्योंकि छपरा के किसान खाद खरीदना छोड़ चुके हैं। वे खुद घर पर खाद बनाते हैं। आइए जानें कैसे।

किसान 15 दिन में बनाते हैं केमिकल फ्री खाद

जिस तरह किसान खेती करते हैं, खेत की तैयारी करते हैं, फसल की बुवाई करते हैं, कटाई करते हैं, उसी तरह घर पर जैविक खाद भी तैयार कर सकते हैं। किसानों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में बताया जाता है कि जैविक खाद 15 दिन के भीतर कैसे बनाई जाए।

आपको बता दें कि छपरा के किसान घर पर जैविक खाद बनाते हैं। वे कहते हैं कि वे खाद नहीं खरीदते। उन्होंने बताया कि जब भी वे सब्जी, अनाज आदि की खेती करते हैं, तो उन्हें अच्छा रिजल्ट मिल रहा है। वे खाद बनाने में गोबर, गोमूत्र, बेसन, मिट्टी, पानी आदि का इस्तेमाल करते हैं। मात्रा की बात करें तो –

  • 10 किलो गोबर,
  • 10 लीटर गोमूत्र,
  • 2 किलो बेसन,
  • 1 किलो वर्मी कम्पोस्ट या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी,
  • और 200 लीटर पानी मिलाकर इस खाद को तैयार किया जाता है।

15 दिन के बाद यह खाद तैयार हो जाती है। जब खेत में सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है, तो उसके साथ यह खाद भी छोड़ देते हैं। इससे पूरे खेत में बराबर मात्रा में खाद पहुंचती है, मिट्टी उपजाऊ होती है और उत्पादन अच्छा मिलता है। इससे फसल को किसी तरह का नुकसान नहीं होता।

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