जनवरी में गेहूं की बुवाई के लिए यह पछेती किस्में है बेस्ट, 81 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिलेगा

On: Thursday, January 1, 2026 9:00 AM
देर से गेहूं की बुवाई के लिए बढ़िया किस्में कौन-सी हैं

गेहूं की बुवाई में देरी हो गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आज आपको गेहूं की उन पछेती किस्मों की जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें देर से बोने पर भी किसान अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।

देर से गेहूं की बुवाई के लिए बढ़िया किस्में कौन-सी हैं

गेहूं की पछेती खेती के लिए ऐसी किस्मों का चुनाव करना चाहिए, जो देर से बुवाई करने पर भी अच्छा उत्पादन दें। यहाँ आपको दो ऐसी वैरायटी की जानकारी दे रहे हैं, जिनमें से एक 81 क्विंटल और दूसरी 68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

एचडी 3086

एचडी 3086 गेहूं की एक बहुत अच्छी वैरायटी है। कई राज्यों के किसान इसकी खेती कर सकते हैं। इसे तैयार होने में लगभग 140 से 145 दिन का समय लगता है। यह किस्म प्रति हेक्टेयर 81 क्विंटल तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इसके दानों की गुणवत्ता बहुत बढ़िया होती है, जिससे अच्छे दाम मिलते हैं।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के किसान इसकी खेती कर सकते हैं। एचडी 3086 को पूसा गौतमी भी कहा जाता है। अनुकूल परिस्थितियों में यह 81 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है। सामान्य हालात में यह 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है, लेकिन सही खाद और उन्नत खेती करने पर उत्पादन और भी बढ़ाया जा सकता है।

DBW 316

गेहूं की DBW 316 भी एक बढ़िया वैरायटी है, जो प्रति हेक्टेयर 68 क्विंटल तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है, लेकिन इसके लिए मौसम और परिस्थितियाँ अनुकूल होना जरूरी है।

इस किस्म की खेती बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के किसान सफलतापूर्वक कर सकते हैं। देर से बुवाई के लिए यह एक अच्छी वैरायटी मानी जाती है, क्योंकि इन क्षेत्रों में अधिकांश किसान गेहूं की बुवाई देरी से करते हैं।

इस किस्म की खासियत यह है कि इसमें प्रोटीन और जिंक की मात्रा अच्छी होती है, जो सेहत के लिए फायदेमंद है। सामान्य परिस्थितियों में इससे औसतन 41 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिलता है, जबकि अनुकूल हालात में इसकी संभावित उपज 68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। यह वैरायटी ब्लास्ट और रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी है।

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