खेती के लिए आई नई तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के मेल से भारतीय खेती बन रही है अधिक लाभदायक, टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी, जानिये कैसे होगा फायदा-
जीवंत बदलाव: डिजिटल खेती और नैसर्गिक खेती
भारतीय कृषि आज एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अब किसान डिजिटल खेती और नैसर्गिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव न केवल खेती को आधुनिक बना रहा है बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा कर रहा है।
डिजिटल खेती क्या है?
डिजिटल खेती का मतलब है खेती में आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों का उपयोग करना। इसमें मोबाइल ऐप, ड्रोन, सेंसर, जीपीएस तकनीक और ऑनलाइन मार्केट प्लेटफॉर्म शामिल हैं। किसान अब खेत की नमी, तापमान और मिट्टी की जांच मोबाइल से कर सकते हैं। ड्रोन का उपयोग करके खाद और कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से किसान सीधे मंडी या उपभोक्ताओं को अपनी उपज बेच सकते हैं जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलता है।

नैसर्गिक खेती क्या है?
नैसर्गिक खेती का मतलब है बिना रासायनिक खाद और कीटनाशक के खेती करना। इसमें गोबर की खाद, जीवामृत, नीम का छिड़काव और देशी बीजों का प्रयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन लंबे समय तक स्थिर रहता है। नैसर्गिक खेती से पर्यावरण को नुकसान नहीं होता और उपज स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती है।
दोनों के फायदे
डिजिटल खेती से किसान समय और लागत दोनों बचा सकते हैं। उदाहरण के लिए ड्रोन से छिड़काव करने पर कम दवा लगती है और काम जल्दी पूरा होता है। जीपीएस तकनीक से सिंचाई सही समय पर और सही जगह हो पाती है।
नैसर्गिक खेती से लागत बहुत कम हो जाती है क्योंकि इसमें महंगी रासायनिक खाद या दवाओं की जरूरत नहीं होती। साथ ही बाजार में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे किसान को ज्यादा दाम मिलता है।
आधे खर्चे में खेती होगी खेती
यदि कोई किसान एक एकड़ जमीन पर नैसर्गिक खेती करता है तो उसकी लागत लगभग 10 से 15 हजार रुपये आती है जबकि रासायनिक खेती में यही लागत 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। नैसर्गिक खेती की उपज भले थोड़ी कम हो लेकिन बाजार में इसकी कीमत 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा मिलती है।
वहीं डिजिटल खेती अपनाने से किसान 15 से 20 प्रतिशत तक लागत घटा सकते हैं और उत्पादन 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं। यदि कोई किसान 5 एकड़ पर काम करता है तो सालाना आय में 1 से 1.5 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
चुनौतियां
डिजिटल खेती की सबसे बड़ी चुनौती है तकनीक की समझ और निवेश। हर किसान के पास स्मार्टफोन या ड्रोन खरीदने की क्षमता नहीं होती। नैसर्गिक खेती की चुनौती यह है कि शुरू में उत्पादन कम हो सकता है जिससे किसान हिचकिचाते हैं।
निष्कर्ष
डिजिटल खेती और नैसर्गिक खेती दोनों ही भारतीय किसानों के लिए जीवंत बदलाव लेकर आ रही हैं। जहां डिजिटल खेती उन्हें तकनीक से जोड़ रही है वहीं नैसर्गिक खेती मिट्टी और पर्यावरण को सुरक्षित रख रही है। यदि किसान धैर्य और सही प्रशिक्षण के साथ इन तरीकों को अपनाएं तो आने वाले समय में उनकी आय बढ़ेगी और खेती टिकाऊ बनेगी।

नमस्ते, मैं निकिता सिंह । मैं 3 साल से पत्रकारिता कर रही हूं । मुझे खेती-किसानी के विषय में विशेषज्ञता प्राप्त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी तरो ताजा खबरें बताउंगी। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको ‘काम की खबर’ दे सकूं । जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप https://khetitalks.com के साथ जुड़े रहिए । धन्यवाद












