गेहूं की यह 3 वैरायटी प्रोटीन से है भरपूर, सेहतमंद होगी रोटी, प्रति हेक्टेयर 71 क्विंटल तक ले सकते हैं उत्पादन

On: Saturday, September 27, 2025 11:00 AM
गेहूं HD 3390 किस्म

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा गेहूं की नई किस्में विकसित की गई है जो की रोग प्रतिरोधी है, ज्यादा उत्पादन देती है, कम समय में पक जाती है, तो चलिए इनके बारे में जानते हैं-

HD 3410 पूसा जवाहर गेहूं

HD 3410 पूसा जवाहर गेहूं अच्छी वैरायटी है, और मध्य प्रदेश दिल्ली के मैदानी क्षेत्र के किसान इसकी खेती करेंगे तो फसल जल्दी विकसित होगी। इसे आप 20 अक्टूबर तक भी लगा सकते हैं। उत्पादन इससे अधिक मिलता है। प्रति हेक्टेयर लगभग 66 से 77 क्विंटल तक उत्पादन इसे ले सकते हैं। इसमें बताया जाता है कि 12.6% उच्च प्रोटीन होता है। जिससे इसकी रोटी सेहत के लिए फायदेमंद होती है। ब्रेड, बिस्कुट इससे बनाएंगे तो उनके गुणवत्ता अच्छी होगी।

यह विभिन्न रोगों के प्रति प्रतिरोधी भी है। जैसे की पत्ती रतुआ, तना रतुआ, धारीदार रतुआ इत्यादि। अगर किसानों को अपने खेतों में गेहूं की फसल में यह रोग देखने को मिलते हैं तो इस वैरायटी का चयन कर सकते हैं, इससे राहत मिलेगी। इसमें करनाल बंद जैसी बीमारी भी फसल में नहीं लगती है।

HD 3388 पूसा यशोधरा गेहूं

एचडी 3388 पूसा यशोधरा गेहूं यह भी बढ़िया किस्म है। वह किसान जो बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम और झारखंड के निवासी हैं। उनके लिए यह अच्छा उत्पादन देने वाली फसल साबित हो सकती है। इसमें किसानों को प्रति एकड़ 52 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है। अगर बढ़िया से खेती करेंगे तो 68 क्विंटल तक भी उत्पादन ले सकते हैं। इसमें धारीदार, रतुआ, पत्ती रतुआ, तना रतुआ जैसे रोग की संभावना कम रहेगी। क्योंकि इन लोगों के प्रति यह प्रतिरोधी होती है। इस वैरायटी की एक खासियत यह भी है कि यह गर्मी सहन कर लेती है। विपरीत परिस्थितियों के लिए यह वैरायटी अच्छी है।

गेहूं HD 3390 किस्म

गेहूं एचडी 3390 किस्म भी बढ़िया है। वह किसान जो दिल्ली एनसीआर के रहने वाले हैं उनके लिए अच्छी वैरायटी है। सिंचित बुवाई की परिस्थितियों के लिए अच्छी है। एक हेक्टेयर से 62.36 क्विंटल तक उत्पादन आराम से किसान ले पाते हैं। लेकिन बढ़िया से खेती करने पर 71.4 क्विंटल तक उत्पादन एक हेक्टेयर से इससे लिया जा सकता है। इसके अनाज में 12% तक प्रोटीन होता है। जिससे इसकी रोटी अच्छी बनती है, और सेहत के लिए फायदेमंद होती है।

इसे तैयार होने में 144 दिन तक का समय लग जाता है। वहीं इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता की बात करें तो यह रतुआ रोग से लड़ने में तेज है। बताया जाता है कि गेहूं की देरी से बुवाई करने के लिए इस वैरायटी का चयन कर सकते हैं।

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