खून बढ़ाने वाला चुकंदर बढ़ाएगा किसानों का बैंक बैलेंस, जानें कब करें चुकंदर की खेती और बुवाई का सही तरीका, ताकि मिले जमकर उत्पादन

On: Sunday, May 11, 2025 7:07 PM
चुकंदर की खेती कब करें? 

चुकुन्दर यानि Beetroot ये एक जड़ वाली सब्ज़ी है, जो शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती है | चेहरे और होठों को सुन्दर बनाने की बात हो, खून बढ़ाना चाहते हो या फिर शरीर को डिटॉक्स करना चाहते हैं तो चुकुन्दर बहुत फायदेमंद माना जाता है । इसकी खेती करके आप अच्छा मुनाफ़ा भी कमा सकते हैं। नीचे इसकी खेती से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई है |

चुकंदर की खेती 

यदि आप एक किसान हैं और एक ऐसी फसल के बारे में जानना चाहते हैं जो आसानी से आपको तगड़ा मुनाफा दे सके, तो यह लेख सिर्फ आपके लिए है क्योंकि आज हम आपको चुकंदर की खेती के बारे में बताने जा रहे हैं। चुकंदर की फसल एक ऐसी फसल है, जिसे बड़ी आसानी से उगाया जा सकता है और इसके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद और दवाओं को बनाने में उपयोग होने वाले गुण बाजार में इसकी मांग को हमेशा बरकरार रखते हैं, चुकंदर की मांग पूरे साल बाजार में बनी रहती है और यदि आप भी अपने खेत में चुकंदर की खेती करते हैं, तो यह आपको कम लागत में अच्छा मुनाफा दे सकती है।

साथ ही चुकंदर की खेती सिर्फ सेहत के लिए नहीं, बल्कि आपके खेत की मिट्टी के लिए भी फायदेमंद होती है। इसकी खेती करने से मिट्टी उपजाऊ बनती है, तो आईए बिना देर किए जानते हैं चुकंदर की खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी: 

चुकंदर की खेती कब करें? 

चुकंदर की खेती किसान पूरे साल में कभी भी कर सकते हैं, लेकिन इसकी बुवाई के लिए दिसंबर से फरवरी के बीच उपयुक्त समय माना जाता है। यह फसल ठंडी जलवायु में अधिक उपज देती है। 18 से 21 डिग्री सेल्सियस का तापमान चुकंदर की अच्छी फसल के लिए आदर्श माना जाता है। यदि आप इसकी खेती कर रहे हैं तो गर्मी और बरसात में चुकंदर की खेती करने से बचें क्योंकि अत्यधिक पानी और नमी के कारण फसल सड़ने का खतरा बना रहता है। 

किस मिट्टी में करें चुकंदर की खेती? 

चुकंदर की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट और बलुई मिट्टी सबसे अधिक उपयोगी मानी जाती है, जिसमें पानी जमा न हो पाए। हालांकि आप चुकंदर को खारी मिट्टी और बंजर जमीन पर भी उगा सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि मिट्टी के पीएच का मान 6 से 7 के बीच होना जरूरी है और चुकंदर की खेती के लिए मिट्टी में नमी बनाए रखना भी आवश्यक होता है। 

चुकंदर की खेती के लिए तैयारी 

यदि आप चुकंदर की बुवाई से पहले अच्छी तरह से खेत की तैयारी करते हैं, तो यह फसल आपको अच्छा उत्पादन देगी। मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी है और इसके लिए सबसे पहले रोटावेटर और फिर कल्टीवेटर की मदद से अच्छी तरह 2-3 गहरी जुताई करें। इसके बाद खेत में गोबर की खाद के साथ साथ खरपतवार नियंत्रण डालकर खेत में छोटी-छोटी क्यारियां और मेड़ बना लें, मेड़ों के बीच की दूरी 10 इंच होनी चाहिए और बीज इस तरह बोयें कि पौधों की आपस में दूरी 3 इंच तक हो। 

क्या है बुवाई का सही तरीका? 

चुकंदर की खेती की अगली कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण है सही बीजों का चयन। सही बीजों का चयन उत्तम फसल की गारंटी की तरह काम करता है इसलिए बीजों का चयन सही तरह से करें। बाजार में आपको चुकंदर के लिए कई तरह के बीज मिल जाएंगे या फिर आप कृषि अनुसंधान केदो से भी चुकंदर के बीज प्राप्त कर सकते हैं। यदि चुकंदर के प्रचलित बीजों की बात करें तो, इनमें क्रिमसन ग्लोब, रूबी रानी, एम एस एच 102, अर्ली वंडर और डेट्रायट डार्क रेड आदि शामिल हैं। आप इनमें से कोई भी बीच ले सकते हैं। 

अब आती है बुवाई की बारी, तो चुकंदर की बुवाई करने के लिए आपको प्रति हेक्टेयर में करीब 4 किलो बीच की जरूरत होती है। इसकी बुवाई के लिए आपने जो क्यारियां बनाई है, उन्हीं क्यारियों में बीजों को 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई में बोएं और बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई भी कर दें। इससे बीजों को अंकुरण में सहायता मिलेगी। 

किस तरह करें चुकंदर में सिंचाई? 

चुकंदर की फसल को बहुत अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है, लेकिन मिट्टी में नमी रहना बहुत जरूरी है। इसकी सबसे पहली सिंचाई बीज बोने के बाद की जाती है, वहीं दूसरी सिंचाई निराई और गुड़ाई करने के बाद करनी चाहिए और दोनों सिंचाईयों के बीच कम से कम 25 दिन का अंतराल होना आवश्यक है। इस बात का खास ख्याल रखें की खेत में पानी जमा न हो पाए। इससे फसल सड़ सकती है।

यदि आपने गर्मी के समय चुकंदर की खेती की है, तो आपको ज्यादा सिंचाई करने की जरूरत पड़ सकती है।

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सही खाद और उर्वरक प्रबंधन देगा अच्छी पैदावार 

सही खाद और उर्वरक का छिड़काव किसी भी फसल के विकास के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। इस तरह चुकंदर में भी अच्छे उत्पादन के लिए खाद और उर्वरक का सही उपयोग करना चाहिए। खेत को तैयार करने के लिए सबसे पहले खेत में 8–10 टन गोबर की खाद डालें।

इसके बाद आप 50 किलो यूरिया, 70 किलो डाई अमोनियम फास्फेट और 40 किलो पोटाश का इस्तेमाल प्रति एकड़ में कर सकते हैं। साथ ही ध्यान रखें कि यदि आपके खेत में खरपतवार होता है, तो उसके नियंत्रण के लिए बीज रोपण करते समय ही पेंडीमीथेनिल का छिड़काव कर दें। इसके अतिरिक्त चुकंदर में होने वाले रोग और उनके निदान के लिए नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करें: 

-यदि चुकंदर की फसल में लीफ स्पॉट रोग लग गया है, तो इसके बचाव के लिए एग्रीमाइसिन का छिड़काव करें।

-कीट का आक्रमण होने पर जल्द से जल्द एंडोसल्फान या मेलाथियान का प्रयोग करें। वरना कीट आपकी फसल को नष्ट कर सकते हैं।

चुकंदर कितने दिन में तैयार हो जाता है? 

चुकंदर की फसल को तैयार होने में बहुत कम समय लगता है। यह लगभग 60-80 दिनों में पूरी तरह से तैयार हो जाती है। हालांकि, यह बुवाई और मौसम पर निर्भर करता है। चुकंदर की फसल तैयार होने पर इसके पत्ते पीले पड़ने लग जाते हैं। यदि चुकंदर के पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लग जाएं, तो आप चुकंदर को निकाल सकते हैं। चुकंदर को आसानी से निकालने के लिए खेत में हल्के पानी का छिड़काव कर दें, इससे मिट्टी नम हो जाएगी और चुकंदर के कंद आसानी से निकाले जा सकेंगे। 

सभी किसान भाई एक एकड़ में 120 से 150 क्विंटल चुकंदर का उत्पादन बड़ी आसानी से कर सकते हैं। बाजार में इसका भाव 40 से 60 रुपए प्रति किलो तक होता है।

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