आज सफलता की कहानी में हम लेकर आए हैं बिहार के किसान जयप्रकाश सिंह की कहानी जो केले की खेती से लाखों की आमदनी कर दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा।
पारंपरिक फसलों की खेती छोड़ अपनाया केले की खेती
जयप्रकाश सिंह बिहार के कैमूर भभुआ जिले नाटी गांव के रहने वाले हैं। पहले वे पारंपरिक फसलें जैसे धान और गेहूं की खेती करते थे। जैसा कि हम जानते हैं कि पारंपरिक फसलों में लागत के साथ समय भी बहुत लगता है पर उस मुताबिक मुनाफा कम होता है। जयप्रकाश सिंह की आमदनी पारंपरिक फसलों से सीमित होती थी इसलिए उन्होंने केले की खेती करने का मन बनाया। आइए जानते हैं वे केले की खेती कैसे करते हैं।
किसान जयप्रकाश सिंह कैसे करते हैं केले की खेती
जयप्रकाश जी केले की जी 9 किस्म की खेती कर रहे हैं। इस केले की किस्म की खास बात यह है कि ये खाने में बहुत स्वाद वाला होता है और इस केले की पैदावार बहुत होती है। इसकी वजह से जयप्रकाश जी ने इस केले की किस्म को खेती के लिए चुना। केले की खेती पारंपरिक फसलों के तुलना में बहुत आसान होती है। इसके लिए मिट्टी का चयन के लिए मिट्टी की जांच करवा कर ही इसकी खेती की शुरुआत करें।
केले की खेती के लिए मिट्टी चिकनी बलुई दोमट मिट्टी,लाल लेटराइट और काली मिट्टी अनुकूल होती है। मिट्टी का PH 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेती से पहले खेत की तीन से चार बार जुताई करने के बाद आखिरी जुताई में गोबर की खाद डाली जाती है। जुताई के बाद 4 से 5 फीट की दूरी पर पौधे लगाए जाते हैं। पौधे जब थोड़े बड़े हो जाते हैं तब सिंचाई की जाती है। केले का पेड़ लगाने के बाद लगभग 9 से 10 महीने में फल आने लग जाते हैं और फल को पकने में 3 से 4 महीनें लग जाते हैं ।
केले की खेती से कमाई 3 लाख तक
जयप्रकाश सिंह ने जब केले की खेती की शुरुआत की थी तब उन्होंने 1 एकड़ में केले की खेती की थी जिसमें उन्हें 20 से 30 लाख तक की लागत आई थी। जिससे उन्हें शुद्ध मुनाफा 3 लाख तक हुआ। यह मुनाफा पारंपरिक खेती से ज्यादा थी जिसमें समय और लागत की तुलना करें तो पारंपरिक खेती में ज्यादा आती थी। केले की फसल की सफलता से खुश होकर उन्होंने अपने केले की खेती का विस्तार किया और अब वह 10 एकड़ में केले की खेती कर रहे हैं। आने वाले सालो में उनकी मुनाफा में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
वे जो जी-9 किस्म के केले की खेती कर रहे उसके स्वाद की वजह से बाजार में इस केले की मांग बहुत रहती है। जिससे उनके फसल बाजार में रुकते नहीं है, बिक जाते है और भाव भी अच्छे मिलते हैं। उनकी सफलता से प्रभावित होकर उनके जिले के किसान भी केले और फलों की खेती करने लग गए हैं।
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