आलू, प्याज, लहसुन की खेती करने से पहले खेत में यह चीज लगा दें और खाद की जरूरत पूरी हो जाएगी। मिट्टी जैविक तरीके से उपजाऊ हो जाएगी।
आलू-प्याज-लहसुन की खेती
आलू, प्याज, लहसुन की खेती में किसानों को मुनाफा है, लेकिन इसके लिए खेत में बढ़िया खाद डालनी पड़ती है, जिसमें अच्छा-खासा खर्चा भी आता है। लेकिन अब किसानों को खाद के खर्चे से मुक्ति मिल सकती है। खेत जैविक तरीके से उपजाऊ हो जाएगा, जिससे उत्पादन भी अच्छा मिलेगा और फसल को पोषण मिलेगा।
इसके लिए आपको आलू, प्याज, लहसुन लगाने से पहले एक बीघा जमीन में 5 किलो ढैंचा का बीज डालना है। इससे कमाई के साथ-साथ खेत की मिट्टी भी खाद बन जाएगी। तो चलिए बताते हैं यह कैसे होगा।
मिट्टी में मिलेगा नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटेशियम और सल्फर
दरअसल, यहां पर ढैंचा की बात की जा रही है। आलू, प्याज, लहसुन लगाने से पहले खेत में अगर ढैंचा की फसल लगा दी जाए तो खाद न के बराबर इस्तेमाल करनी पड़ेगी। बिना खाद डाले भी आप खेती कर सकते हैं। जिस खेत में ढैंचा की फसल लग जाती है, उसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर की कमी पूरी हो जाती है। ये सभी पोषक तत्व मिट्टी को मिल जाते हैं।

जब ढैंचा की फसल तैयार हो जाती है, तो उसे रोटावेटर से खेत की मिट्टी में दबा दिया जाता है और यह एक जैविक खाद बन जाती है। कुछ किसान ढैंचा की खेती करके उसके बीज निकालकर बेच देते हैं, जो कि लगभग ₹5000 प्रति क्विंटल बिकता है।
45 दिन में होती है यह फसल तैयार
ढैंचा की फसल 45 से 60 दिन के बीच तैयार हो जाती है। उसके बाद इसे खेत की मिट्टी में दबा दिया जाता है और मिट्टी उपजाऊ हो जाती है। जब ढैंचा का पौधा 1 से 2 फीट या फिर 3 से 4 फीट का हो जाए, तो उसे मिट्टी पलटने वाले हल से काटकर मिट्टी में मिला देना चाहिए। इससे मिट्टी की जल धारण करने की क्षमता भी बढ़ जाती है और यूरिया खाद की जरूरत कम हो जाती है।
ढैंचा मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिर करने का काम करता है और साथ ही खरपतवार की संख्या में कमी लाने में भी मदद करता है।