मक्का की पैदावार बढ़ाना चाहते हैं, मिट्टी को खराब होने से बचाना चाहते हैं तथा खेती के खर्चे को घटाना चाहते हैं, तो चलिए कृषि विभाग द्वारा जारी की गई सलाह जानते हैं।
मक्का के किसानों के लिए कृषि विभाग की सलाह
मक्का की खेती करने वाले किसानों को अब कुछ अहम फैसले लेने की जरूरत है। फसल को सही मात्रा में खाद और उर्वरक देना जरूरी है, ताकि आने वाले समय में अच्छा उत्पादन मिल सके। कुछ किसानों की मक्का की फसल 45 से 70 दिन की हो गई है। ऐसे में उन्हें बहुत ज्यादा ध्यान रखना होगा। तभी वे पैदावार बढ़ा पाएंगे और गलतियों से भी बच सकेंगे।
कृषि विभाग ने सलाह दी है कि कौन सी खाद डालें और कितनी मात्रा में डालें। अगर खाद का अधिक उपयोग किया जाए तो मिट्टी खराब हो सकती है और उत्पादन घट सकता है।
खाद का ज्यादा इस्तेमाल करने से होगा नुकसान
खाद का इस्तेमाल पैदावार बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन जब अधिक मात्रा में खाद डाल दी जाती है, तो नुकसान भी हो सकता है। इससे फसल और मिट्टी दोनों खराब हो सकते हैं, साथ ही किसानों का खर्चा भी बढ़ जाता है।
कृषि विभाग ने बताया है कि मक्का के किसानों को यूरिया खाद का ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान बहुत ज्यादा यूरिया और एनपीके खाद डालते हैं तो उत्पादन बढ़ने के बजाय घट सकता है। इससे पौधों का विकास रुक जाएगा, मिट्टी खराब होगी, भूजल प्रदूषित होगा और मिट्टी में कीट व रोग बढ़ जाएंगे। कुल मिलाकर, पैदावार घट जाएगी और खर्चा भी बेवजह लगेगा।
मक्का की फसल में दें यह खाद
मक्का के किसानों को संतुलित मात्रा में खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर किसान डीएपी (46% P₂O₅ और 18% N) का उपयोग कर रहे हैं तो यूरिया की मात्रा एक हेक्टेयर में 200 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कृषि विभाग ने किसानों को नैनो यूरिया के इस्तेमाल की सलाह दी है। यह ज्यादा बेहतर होता है क्योंकि इसमें यूरिया की खपत लगभग 20–30% कम हो जाती है।

नैनो यूरिया की मात्रा 4–5 मिलीलीटर को 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जाता है। यह छिड़काव पत्तियों पर किया जाता है, जिससे फसल को सीधा पोषण मिलता है। वहीं, दानेदार खाद मिट्टी में डाली जाती है, जिसका पोषण धीरे-धीरे फसल को मिलता है। लेकिन अगर खेत में खाद का लीचिंग हो जाए तो वह मिट्टी से नीचे चली जाती है और फसल को पोषण नहीं मिल पाता। इससे नुकसान होता है।
इसीलिए कृषि विभाग ने कहा है कि किसान नैनो यूरिया का इस्तेमाल करें, यूरिया की मात्रा घटाएं, समय पर खरपतवार निकालते रहें, रोग व कीटों पर नजर रखें और फसल का निरीक्षण करते रहें। किसी भी समस्या पर तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें।

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