किसान अगर फसल को कीटों से बचाना चाहते हैं तो आइये आपको बताते हैं एक देसी जुगाड़ जिससे खर्च भी नहीं आएगा-
फसल को कीट-फंगस से बचाने का देसी जुगाड़ क्या है
फसल को कीट-फंगस से बचाने के लिए देसी जुगाड़ अपना सकते हैं जो की सुरक्षात्मक तौर पर काम करेगा। खेती बागवानी करने वाले लोगों को फायदा होगा सब्जी की खेती करते हैं, या बगीचे में थोड़ी बहुत कोई फसल लगा रखी है, चना-सरसो आदि की खेती करते हैं तो इसका उपाय कर सकते हैं। इससे पत्तियों में चमक आती है। इसकी खुशबू से कीट नहीं लगेंगे। फंगस की समस्या भी नहीं आएगी। जब फसल का विकास होता है। उस समय इसका इस्तेमाल किया जाता है।
दरअसल, यहां पर कपूर की बात की जा रही है। कपूर की तेज गंध कीटों को दूर भगाती है। फसल को स्वस्थ बनाकर रखती है, आइये आपको बताते हैं फसल में कपूर का इस्तेमाल का तरीका और मात्रा क्या है।

कपूर का इस्तेमाल फसल में किस तरह से किया जाता है
कपूर का इस्तेमाल करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि शाम के समय इसका छिड़काव खेत में करना है और पत्तियों में बहुत ज्यादा नहीं छिड़कना है कि पानी बिल्कुल बहुत देर तक रुका रहे। कम मात्रा में छिड़काव करना है। मात्रा की बात करें तो 15 लीटर के टैंक में 6 से 7 ग्राम या 5-6 ग्राम ही पाउडर इसका मिलाएं। पाउडर बनाकर मिलाने पर ही यह पानी में घुलता है। इसके बाद आप स्प्रे कर सकते हैं। स्प्रे आपको बुवाई के 30 से 35 दिन बाद ही किसी फसल में करना है। यानी कि अगर फसल एक महीने से छोटी है तो उसमें इसका स्प्रे नहीं करना चाहिए।
अगर पहली बार किसी फसल में इसका स्प्रे करने जा रहे हैं तो पहले चार-पांच पौधों पर कर सकते हैं अगर पत्तियां नहीं जल रही है कोई दुष्प्रभाव नहीं दिख रहा है तो पूरी फसल में कर सकते हैं। कपूर का इस्तेमाल करते समय एक सावधानी भी बरतनी है कि स्टिकी केमिकल, सल्फर या तेल वाला प्रोडक्ट ना मिलाएं। इस कपूर में एंटीफंगल, एंटी इंसेंट होता है। जिससे यह फायदेमंद है।

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