अगर आलू की फसल को पाला और कोहरे से बचाना चाहते हैं, तो आइए बताते हैं एक ऐसे देसी जुगाड़ के बारे में, जिसमें खर्च न के बराबर आता है और फसल सुरक्षित रहती है।
आलू की फसल में सर्दी का कहर
सर्दी में अगर आलू की खेती की है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। जैसा कि आप जानते हैं, आलू की फसल को सर्दी में पाला और कोहरे से बहुत ज्यादा नुकसान होता है। इससे झुलसा रोग होने का भी खतरा बढ़ जाता है। जब फसल पर ज्यादा पाला पड़ता है, तो पत्तियां झुलसने लगती हैं और धीरे-धीरे सूख जाती हैं। अगर आलू के खेतों में पाला अधिक पड़ जाए, तो इससे सीधा पैदावार घट सकती है। आलू का आकार खराब हो सकता है और रंग में भी बदलाव देखने को मिलता है। साथ ही सड़न की समस्या भी आ सकती है।
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे 30 से 50 प्रतिशत या इससे ज्यादा तक नुकसान हो सकता है। इसलिए पाला से फसल को बचाना बहुत जरूरी है। अगर आप ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते या कम खर्च में उपाय चाहते हैं, तो नीचे बताए गए उपाय अपनाएं।
पाला से आलू की फसल बचाने का देसी जुगाड़
पाला से आलू की फसल को बचाने के लिए राख का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में किसान लंबे समय से करते आ रहे हैं। इसके लिए लकड़ी की राख को ठंडा कर लें, फिर उसके बड़े कण अलग कर दें और बारीक पाउडर की तरह खेत में छिड़काव करें। इससे पत्तियों पर राख की एक परत जम जाती है और पाला का सीधा असर पत्तियों पर नहीं पड़ता। यह देसी कीटनाशक की तरह भी काम करता है।
इसके अलावा पुराने छाछ का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, यह भी कीटनाशक के रूप में असरदार होता है। अगर राख का उपाय कारगर न हो, तो दूसरा तरीका अपनाया जा सकता है। इसके लिए छांछ को पानी में मिलकर छानकर स्प्रे किया जाता है।
आलू की फसल में गंधक का स्प्रे
आलू की फसल में गंधक का स्प्रे भी किया जा सकता है। यह सर्दी में फसल को पाला से बचाने में मदद करता है। अगर खेत में पाला ज्यादा पड़ रहा है, तो 1 लीटर गंधक को 1000 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में स्प्रे करें। जो किसान बड़े पैमाने पर आलू की खेती करते हैं, उनके लिए यह उपाय काफी कारगर है। वहीं अगर आपने घर के बगीचे में आलू लगाए हैं, तो राख का इस्तेमाल करके भी फसल को पाला और कोहरे से बचाया जा सकता है।
इसके साथ ही सुबह जल्दी या शाम के समय खेत के किनारों पर हल्की आग जलाकर भी तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे पाला का असर कम होता है।
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