मध्य प्रदेश में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर सरकार भारी अनुदान दे रही है। इससे किसान आधे से भी कम दाम में अपने खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगवा सकते हैं। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से पानी की बचत होती है, साथ ही खेती का खर्च भी कम होता है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर के फायदे
अगर किसान अपने खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाते हैं, तो पानी की बहुत ज्यादा बचत होती है। पानी की बर्बादी नहीं होती और जरूरत से ज्यादा पानी खेत में नहीं गिरता, जिससे खरपतवार भी कम उगती है। सिंचाई के लिए बार-बार खेत में जाने की जरूरत नहीं पड़ती और मजदूर भी कम लगते हैं, जिससे मजदूरी की लागत बच जाती है। समय पर और आवश्यकता के अनुसार पौधों को पानी मिलता है, जिससे पौधे अच्छे से विकसित होते हैं। सरकार किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर सब्सिडी देकर इस तकनीक को बढ़ावा दे रही है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर पर कितना अनुदान मिल रहा है
ड्रिप और स्प्रिंकलर का लाभ लेने के लिए यह सुनहरा अवसर है। मध्य प्रदेश के सतना जिले के सोहावल विकासखंड में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर भारी अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना के तहत किसान एक हेक्टेयर से लेकर दो हेक्टेयर तक की भूमि के लिए आवेदन कर सकते हैं। दो हेक्टेयर भूमि के लिए आवेदन करने पर ड्रिप सिस्टम पर लगभग 55 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, जो करीब ₹70,000 तक हो सकती है।
जिसमें अधिकारियों के अनुसार, एक हेक्टेयर में ड्रिप सिस्टम लगाने का खर्च ₹90,000 से ₹1,00,000 तक आता है, जिसमें आधे से ज्यादा राशि अनुदान के रूप में मिल जाती है। इस वजह से किसानों पर लागत काफी कम पड़ती है। यह किसानों के लिए एक अच्छा अवसर है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर पर अनुदान के लिए कहां और कैसे करें आवेदन
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर अनुदान के लिए किसान उद्यानिकी विभाग में पंजीयन कर सकते हैं। आवेदन के समय किसानों के पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि के कागज, बी-1 की प्रति और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे दस्तावेज होना जरूरी है। अधिकारियों ने बताया कि ड्रिप सिस्टम के लिए सभी वर्गों के किसानों के लिए लक्ष्य शेष है, इसलिए सभी किसान इसका लाभ ले सकते हैं। वहीं पोर्टेबल स्प्रिंकलर सिस्टम के लिए फिलहाल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों के लिए ही लक्ष्य बचा हुआ है। ये किसान आवेदन कर योजना का लाभ उठा सकते हैं।

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