Akarkara Farming: कम समय में तैयार होने वाली और कम खर्च की फसल लगाना चाहते हैं, तो चलिए आपको इस खेती के बारे में बताते हैं।
ईरानी अकरकरा की खेती
ईरानी अकरकरा एक ऐसी फसल है, जो बहुत कम समय में तैयार हो जाती है और किसानों को इसका अच्छा दाम मिलता है। बता दें कि इस समय बाजार में ईरानी अकरकरा का भाव ₹60,000 से लेकर ₹75,000 प्रति क्विंटल तक चल रहा है, जिससे किसानों को इसकी खेती में अच्छा मुनाफा होता है।
ईरानी अकरकरा की खेती भारत के कई राज्यों में की जाती है, जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा। यह फसल समशीतोष्ण जलवायु में अच्छी तरह उगती है। आइए जानते हैं कि एक बीघा में कितना बीज लगता है और कितना उत्पादन मिलता है।
ईरानी अकरकरा की खेती कैसे होती है
ईरानी अकरकरा की खेती करने के लिए किसानों को सबसे पहले नर्सरी तैयार करनी पड़ती है। एक बीघा के लिए लगभग 1.5 से 2 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। करीब 2 महीने में नर्सरी तैयार हो जाती है। इसके बाद खेत में इसकी रोपाई की जाती है। रोपाई के लगभग 1 महीने बाद फसल तैयार होने लगती है और करीब 6 महीने तक इसकी तुड़ाई की जा सकती है। एक बीघा से किसानों को लगभग 4 से 5 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है।
ईरानी अकरकरा फसल में खाद और पानी की जरूरत
ईरानी अकरकरा की फसल में ज्यादा खाद और पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। जब आप फसल की तुड़ाई करते हैं, उसके बाद खेत में हल्का पानी दे सकते हैं। खाद की बात करें तो खेत की तैयारी के समय केवल जैविक खाद डालना पर्याप्त होता है। इसके बाद दोबारा खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती है।
इस फसल में किसी प्रकार की रोग-बीमारी नहीं लगती, इसलिए रासायनिक कीटनाशक या रासायनिक खाद की भी जरूरत नहीं होती। ईरानी अकरकरा एक औषधीय फसल है। इसके पौधों की लंबाई लगभग 1 से 4 फीट तक होती है।

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