MP के सरसों और मूंगफली के किसानों को बड़ा फायदा होने वाला है। अब किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत मिलेगी। भावांतर भुगतान योजना को लेकर सरकार ने यह महत्वपूर्ण घोषणा की है।
MP के सरसों और मूंगफली के किसानों के लिए योजना
मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों को इस समय भावांतर भुगतान योजना का भरपूर फायदा मिल रहा है। किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत मिलती है और किसी भी तरह का घाटा नहीं होता। अगर मंडी में किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है, तो MSP और मंडी भाव के बीच का अंतर सरकार सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है।
इसी तरह अब सरसों और मूंगफली की खेती करने वाले किसानों को भी भावांतर भुगतान योजना का लाभ मिलेगा। सहकारिता मंत्री ने विधानसभा में घोषणा करते हुए भावांतर योजना में मूंगफली और सरसों को शामिल कर दिया है। अब आइए जानते हैं कि विधानसभा में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग द्वारा किसानों के लिए कौन-कौन सी योजनाओं की जानकारी दी गई, जिनका फायदा उठाकर किसान आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत हो सकते हैं।
किसानों के लिए लाभकारी सरकारी योजनाएं
मंत्री द्वारा किसानों के लिए कई सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई है, जिससे किसान इन योजनाओं से जुड़कर खेती से होने वाली आमदनी में वृद्धि कर सकते हैं और खेती की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। विधानसभा में सहकारिता मंत्री ने बताया कि किसानों के लिए-
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
- मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना
- रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- परंपरागत कृषि विकास योजना
- नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग
जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ लेकर किसान कम लागत में खेती कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाएं किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बन रही हैं।
एमपी में इन फसलों का होता है अधिक उत्पादन
मध्य प्रदेश में कई फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। मसूर का क्षेत्रफल राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर है। इसके अलावा गेहूं के क्षेत्रफल में मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान पर है। चना उत्पादन में भी राज्य दूसरे स्थान पर है। उड़द उत्पादन में भी द्वितीय स्थान प्राप्त है। वहीं मक्का के क्षेत्रफल में मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान रखता है। इस तरह राज्य में कई ऐसी फसलें हैं, जिन्हें किसान बड़ी मात्रा में उगाते हैं। जो फसलें कम क्षेत्रफल में बोई जाती हैं, उन पर भी सरकार का सहयोग किसानों को लगातार मिल रहा है।
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