किसानों को अब पराली जलाने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे इसे आमदनी का जरिया बना सकते हैं। आइए बताते हैं कैसे।
पराली से किसानों की आमदनी कैसे बढ़ेगी
पराली से मिट्टी उपजाऊ बनेगी। पराली मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर कर देती है। अब किसानों को पराली जलाना नहीं पड़ेगा, क्योंकि पराली किसानों के काम आएगी। जब पराली से मिट्टी उपजाऊ होगी तो किसानों को पैदावार अधिक मिलेगी। इसके अलावा पराली से किसान खाद भी बना सकते हैं और उसे बेचकर पैसा कमा सकते हैं। पराली की मांग बढ़ने से किसानों को इसे फेंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बता दें कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) द्वारा एक पूसा डीकंपोजर दवा बनाई गई है, जो किसानों को पराली से बहुत ज्यादा फायदा देगी।
पूसा डीकंपोजर का किसान कैसे करें इस्तेमाल?
पूसा डीकंपोजर किसानों के लिए बहुत ही लाभकारी साबित होगा। पूसा डीकंपोजर का इस्तेमाल किसान पराली को खाद बनाने में कर सकते हैं। इसे पराली के ऊपर छिड़का जाता है और 15 से 20 दिनों में पराली खाद का रूप ले लेती है। इसमें विभिन्न प्रकार के फफूंद होते हैं, जो पराली को जैविक खाद में बदलने का काम करते हैं। पूसा डीकंपोजर कैप्सूल, पाउडर और लिक्विड के रूप में मिलता है, जिसका उपयोग किसान आसानी से कर सकते हैं।

किसानों को बांटा जा रहा है पूसा डीकंपोजर
पूसा डीकंपोजर किसानों के लिए इसलिए बनाया गया है क्योंकि पराली जलाने की समस्या लगातार बढ़ रही है। इससे पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है, मिट्टी खराब होती है और किसानों को नुकसान भी होता है। समाधान न मिलने पर किसान पराली जला देते हैं, लेकिन अब पराली को आप 15–20 दिनों में खाद के रूप में बदल सकते हैं। इससे किसानों का खाद पर खर्च भी बचेगा।
इसीलिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) की तरफ से पूसा डीकंपोजर किसानों को दिया जा रहा है, ताकि किसान इसका इस्तेमाल करके पराली को खाद बना सकें और उसे बेचकर आमदनी बढ़ा सकें या अपने खेतों में डालकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ा सकें। दोनों ही तरीकों से किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

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