रामदाना, जिसे राजगीरा और चौलाई भी कहते हैं, इसकी खेती मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में की जाती है। इसकी खेती करके किसान अच्छा-खासा मुनाफा कमा सकते हैं। आइए इसकी खेती के बारे में जानते हैं।
रामदाना की खेती में कमाई
रामदाना की खेती किसानों के लिए आमदनी का एक अच्छा जरिया बन चुकी है, क्योंकि इसकी डिमांड बढ़ रही है। इसमें ग्लूटेन नहीं होता, जिससे यह सेहत के लिए फायदेमंद है। रामदाना के दानों से आटा और लड्डू जैसी कई तरह की चीजें बनाई जाती हैं। जिन क्षेत्रों में पानी की समस्या रहती है, वहां भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है, क्योंकि सूखा पड़ने पर भी यह फसल जल्दी खराब नहीं होती।
किसान यदि रामदाना की खेती एक हेक्टेयर में करते हैं, तो 10 से 15 क्विंटल तक दानों का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और 20 से 25 क्विंटल तक हरा चारा मिल सकता है। इसके लिए किसानों को बढ़िया वैरायटी का चयन करना चाहिए। सही देखभाल से किसान प्रति हेक्टेयर 50,000 से 80,000 रुपये तक कमा सकते हैं। आईए जानते हैं इसकी खेती में लगने वाला समय और खर्चा।
रामदाना की खेती में खर्च कितना आता है
रामदाना की खेती खर्च से कई गुना ज्यादा मुनाफा दे सकती है। कई किसान बताते हैं कि उन्हें एक हेक्टेयर में 10,000 से 15,000 रुपये की लागत आती है, जिससे अच्छी फसल तैयार हो जाती है। गर्मियों में यह किसानों के लिए वरदान साबित होती है, क्योंकि यह 50 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन करने की क्षमता रखती है।
यह फसल 90 से 110 दिनों के बीच तैयार हो जाती है, लेकिन यह पूरी तरह वैरायटी पर निर्भर करता है। कुछ वैरायटी 110 से 135 दिनों में तैयार होती हैं, तो कुछ 75 से 145 दिनों के बीच भी पक सकती हैं। इसलिए रामदाना की खेती में कितना समय लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन-सी वैरायटी का चयन करते हैं।
रामदाना का बाजार भाव कितना मिलता है
रामदाना के बाजार भाव की बात करें, तो किसानों को इसकी गुणवत्ता के अनुसार कीमत मिलती है। आमतौर पर इसका भाव 4,000 रुपये से 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल जाता है।
किसान यदि इसकी खेती करना चाहते हैं, तो खरीफ सीजन में इसकी बुवाई कर सकते हैं। जून के आखिरी सप्ताह से जुलाई के मध्य तक इसकी बुवाई होती है। अगस्त से सितंबर के बीच फसल तैयार हो जाती है, जिसके बाद इसकी कटाई की जाती है। कटाई के बाद फसल को 4 से 5 दिन तक धूप दिखाया जाता है, फिर मड़ाई की जाती है। दानों को अच्छी तरह साफ करके उनकी बिक्री की जाती है।

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