आज सफलता की कहानी में हम लेकर आए हैं बिहार के किसान शशि भूषण सिंह जी की कहानी, जो नए तरह की सब्जियों की खेती करके पूरे जिले में अपना नाम कमा रहे हैं।
शशि भूषण सिंह का परिचय
शशि भूषण सिंह बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने मैट्रिक तक की पढ़ाई की है। मैट्रिक करने के बाद उन्होंने खेती में अपना भविष्य देखा। खेती तो करनी थी उन्हें, पर पारंपरिक फसलों की खेती नहीं कुछ अलग तरह की खेती करनी थी। जिसके लिए उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालय में संपर्क किया। उनके मार्गदर्शन से वे खेती में आगे बढ़े हैं।
मौसम के अनुरूप फसल लगाते हैं
शशि भूषण अपने खेत में कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालय के बताए गए रूपरेखा को ध्यान में रखकर खेती करते हैं। फसल को लगाने से पहले खेत की मिट्टी की जांच करते हैं, जिससे उन्हें मिट्टी की गुणवत्ता का पता चलता है। कितनी खाद और कितने पानी की जरूरत है,यह पता चलता है। फसल की अच्छी उत्पादन में मिट्टी का उपजाऊ होना बहुत जरुरी होता है।
मिट्टी की बाद आती है बीज की बारी अच्छी और गुणवत्ता वाले बीज का चुनाव करना होता है। शशि भूषण जी नई-नई वैरायटी के अच्छे गुणवत्ता वाले बीज मंगवाते हैं। वे फसल को दूसरे किसानों से पहले लगाते हैं ताकि बाजार में उनकी फसल सबसे पहले पहुंचे।
अपने 3.5 एकड़ खेत में जैविक ढंग से खेती करते हैं, जिसमें वह हरएक बार नई-नई सीजनल सब्जियां बोते हैं। सब्जियों में वे लाल बंधगोभी,जुकीनी,शिमला मिर्च,मटर,गाजर,गांठ गोभी,फूलगोभी,ब्रोकली,शलजम और भी बहुत तरह क़ी सब्जियों की खेती करते हैं।
ढ़ेरों पुरष्कारो से सम्मानित किया जा चुका
शशि भूषण जी को कृषि विश्वविद्यालय सबौर की तरह से 16 पुरष्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें यह पुरस्कार नई सब्जियों की अच्छी उत्पादन के साथ सफलता पूर्वक इनकी खेती करने के वजह से मिला है , सब्जियां जैसे ब्रोकली,लाल गोभी,मटर,शलजम इत्यादि।
उनकी खेती करने का तरीका बाकी सभी किसानों से अलग है, जिसके वजह से उन्हें सम्मान तो मिल ही रहा है, साथ ही बाजार में उनके सब्जियों की मांग बनी रहती है। उसके पीछे तीन कारण हैं,पहली उनकी सब्जियां मार्केट में सीजन की शुरुआत में ही सबसे पहले पहुंच जाती हैं,दूसरी उनके फसलें नई नई वैरायटी की होती हैं और तीसरा उनकी फसल जैविक ढंग से उगाई जाती है, जिसके वजह से फसल लंबे समय तक ख़राब नहीं होती और ताजा रहते है।
अपनी सफलता की कहानी से उनका दूसरे किसानों के लिए यह संदेश है कि नई फसल की खेती करें और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह को जरूर अपनी खेती में उतारें, जिससे उन्हें फसल से दोगुनी आमदनी होगी और भविष्य सुरक्षित रहेगा।
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