गेहूं की पैदावार में नहीं होगी कोई कमी, बुवाई से पहले करें ये एक महत्वपूर्ण काम-कीट रोग नहीं लेंगे खेत में आने का नाम, जाने

On: Tuesday, November 4, 2025 8:11 PM
गेहूं की पैदावार में नहीं होगी कोई कमी, बुवाई से पहले करें ये एक महत्वपूर्ण काम-कीट रोग नहीं लेंगे खेत में आने का नाम, जाने

गेहूं की खेती बहुत मुनाफे वाली होती है इसकी डिमांड पूरे देश भर में होती है और गेहूं का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन भारत में ही होता है गेहूं की खेती से पहले कुछ जरुरी बातों को जानना आवश्यक होता है तो चलिए इस लेख के माध्यम से इसके बारे में विस्तार से जानते है।

गेहूं की पैदावार में नहीं होगी कोई कमी

गेहूं की खेती बहुत बड़े पैमाने पर की जाती है गेहूं की खेती करने से पहले कुछ जरुरी बातें जानना आवश्यक होता है तभी गेहूं की उपज अच्छी उच्च क्वालिटी वाली प्राप्त होती है गेहूं की खेती के लिए सबसे पहले अच्छी वैरायटी के बीजों का चयन करना आवश्यक होता है फिर बुवाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी और बीजों का उचित उपचार करना चहिए। जिससे गेहूं की फसल में कीट बीमारियां नहीं लगती है और उपज अच्छी गुणवत्ता वाली होती है। गेहूं के बीजों उपचारित करने के लिए हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बता रहे है जो बहुत फायदेमंद होती है। ये चीज आपको बाजार में खाद बीज की दुकान में आसानी से मिल जाएगी तो चलिए जानते है कौन सी चीज है।

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बुवाई से पहले करें बीजों का उपचार

गेहूं की बुवाई से पहले गेहूं के बीजों को उपचारित करने के लिए हम आपको ट्राइकोडर्मा के बारे में बता रहे है ट्राइकोडर्मा एक जैविक फफूंदनाशक है। जो गेहूं की फसल को फंगस और फफूंद से बचाता है। ये जड़ गलन, उखटा, और झुलसा जैसे मिट्टी से होने वाले फंगल रोगों को नियंत्रित करता है। ये जैविक होने के कारन न केवल फसल के लिए फायदेमंद होता है बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसका प्रयोग पौधों की जड़ों को गहरा बनाने और पोषक तत्वों को अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने में मदद करता है, जिससे पौधों की वृद्धि तेज होती है।

कैसे करें प्रयोग

ट्राइकोडर्मा का उपयोग बीज उपचार, मिट्टी के उपचार और खाद के साथ मिलाकर किया जा सकता है। बीज उपचार के लिए 6-8 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलो बीज के लिए पर्याप्त होता है। आपको बता रहे ट्राइकोडर्मा का उपयोग करने के बाद 4-5 दिनों तक किसी भी रासायनिक फफूंदनाशी का उपयोग नहीं करना चाहिए। गेहूं के बीजों का उपचार ट्राइकोडर्मा से करने से गेहूं की फसल में कीट फफूंद रोग लगने का खतरा ज्यादा नहीं रहता है फसल एकदम स्वस्थ हरी भरी रहती है।

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