गन्ने की बुवाई का गोल्डन पीरियड चल रहा है। इस समय के गन्ने जब तैयार होकर मार्केट में पहुँचते है तो अच्छे दाम प्राप्त करते है। तो चलिए गन्ने की बुवाई के लिए सही विधि के बारे में विस्तार से जानते है।
इस विधि से करें गन्ने की बुआई
शरदकालीन में गन्ना की बुवाई अक्टूबर नवंबर के महीने में की जाती है। इस सीजन में बुवाई के लिए अच्छी रोगप्रतिरोधक किस्म का चयन करना चाहिए जिससे गन्ने की पैदावार बहुत शानदार मिलती है गन्ने की बुवाई के लिए हम आपको ट्रेंच विधि के बारे में बता रहे है इस विधि से बुवाई करने से पानी की बचत, बेहतर अंकुरण और कम लागत आती है साथ ही पैदावार भी बहुत बंपर होती है। इस विधि से बुवाई करने से भूमिगत कीटों का प्रकोप कम होता है और चीनी की पैदावार में भी सुधार होता है। साथ ही गन्ने गिरने से भी बचते है ट्रेंच विधि से गन्ने की खेती जरूर करना चाहिए।

ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई
गन्ने की ट्रेंच विधि से बुवाई करने के लिए पहले खेत की गहरी जुताई करना चाहिए और समतल करना चाहिए। फिर ट्रेंच ओपनर से 1 फीट चौड़ी और 20 से 24 सेमी गहरी नालियां बनाई जाती है इन नालियों में संतुलित खाद जैसे 90-100 किलोग्राम यूरिया, 125-130 किलोग्राम DAP एवं 100 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए इसके बाद गन्ने के 3 आँखों वाले टुकड़े नालियों में रखकर मिट्टी से ढक देना चाहिए। बुवाई के बाद तुरंत सिंचाई करना चाहिए। बुवाई के बाद गन्ने की फसल 15 से 16 महीने में तैयार हो जाती है।
ट्रेंच विधि के फायदे
- ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करने से पानी की बचत होती है क्योकि सिंचाई केवल नालियों में की जाती है।
- पौधे गिरने से बचते है।
- कीट रोग का प्रकोप कम होता है।
- पैदावार अधिक और उच्च गुणवत्ता वाली प्राप्त होती है।

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