अगर इस साल गेहूं की बुवाई से पिछले साल की तुलना में ज्यादा फायदा लेना चाहते हैं, तो खेत की मिट्टी का शोधन जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि यह कैसे किया जाता है-
गेहूं की खेती
गेहूं की खरीद सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करती है। इसकी खेती में किसानों को अच्छा लाभ होता है। अगर किसान अधिक उत्पादन लेना चाहते हैं, तो उन्हें कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। बीजों की बुवाई से पहले खेत की तैयारी में भी विशेष ध्यान देना होता है, जैसे कि मिट्टी का शोधन। क्योंकि मिट्टी में कई प्रकार के मिट्टी जनित रोग होते हैं, जो फसल को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
कई किसान लंबे समय से रासायनिक खादों का उपयोग करते आ रहे हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है। इसलिए जमीन को मजबूत बनाने और उसे रोगों से बचाने के लिए भूमि शोधन करना आवश्यक हो जाता है।

भूमि शोधन कैसे करें?
गेहूं की बुवाई से पहले भूमि शोधन कर लेना लाभकारी होता है। इसके लिए आपको जैविक रसायनों का उपयोग करना चाहिए। जिसमे ट्राइकोडर्मा और ब्यूवेरिया बेसियाना जैसे जैविक उत्पादों का प्रयोग कर सकते हैं। इनका उपयोग करने के लिए इन्हें गोबर की खाद में मिलाकर एक ढेर बनाया जाता है और उसे बोरे से ढक कर 7 दिनों तक रखा जाता है। इसके बाद जब मिट्टी में हल्की नमी हो, तब इस मिश्रण को खेत में मिला दिया जाता है। इसके लगभग 15 दिन बाद गेहूं की बुवाई की जा सकती है।
इस प्रक्रिया से जमीन का शोधन हो जाएगा, मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंद नष्ट हो जाएंगे और जमीन फिर से उपजाऊ बनने लगेगी। साथ ही, जैविक खाद बनने की प्रक्रिया भी तेजी से शुरू हो जाएगी, जिससे किसानों को अच्छा लाभ मिलेगा।
बीज का शोधन भी है जरूरी
इसके अलावा, किसानों को बीज का भी शोधन करना चाहिए। इसके लिए ट्राइकोडर्मा पाउडर का उपयोग किया जा सकता है। इससे बीज जनित रोगों से फसल को बचाया जा सकता है। बीज शोधन के लिए बाजार में कई प्रकार के रसायन उपलब्ध हैं, लेकिन किसानों को कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही उचित रसायन का चयन करना चाहिए।
शोधन प्रक्रिया के लिए गेहूं के बीजों को किसी छायादार स्थान पर फैलाया जाता है, उन पर हल्का पानी छिड़का जाता है और फिर शोधन रसायन डाला जाता है। इसके बाद सभी चीजों को अच्छे से मिलाया जाता है। जब बीज सूख जाते हैं, तब उनकी बुवाई की जाती है। इस तरह बीजों से एक स्वस्थ फसल तैयार होती है और पैदावार में वृद्धि होती है।

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