बिहार के मुज्ज़फरपुर के रहने वाले किसान नृपेंद्र कुमार मिलेट की खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी लाखों में हो रही है। चलिए उनकी सफलता की कहानी जानते हैं।
मिलेट्स की खेती की शुरुआत
नृपेंद्र कुमार बिहार मुज़फ्फरपुर के ग्राम वटुकट के रहने वाले हैं। नृपेंद्र जी अपने खेत में बहुत-सी फसलें लगाते हैं, पर वे इन सब फसलों के साथ कुछ और भी फसल की खेती करना चाहते थे, जिससे उनकी आमदनी बढ़े। फिर उनको किसान समूह से प्रेरणा मिली। उन्हें यह पता चला कि मिलेट की खेती में लागत कम लगता है, उपज ज्यादा होती है और मार्केट में डिमांड भी बहुत रहती है।
प्रशिक्षण से मिली हौसला
मिलेट की खेती के लिए उन्हें एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से बहुत-सी प्रशिक्षण प्राप्त हुई, जैसे किसान गोष्ठी – दिल्ली (2016),ICAR-पूसा से प्रशिक्षण (2024) और Millets Marketing Training (2024) जिसके बाद उन्हें पता चला कि मिलेट्स की खेती करने में कम पानी, कम लागत और कम समय लगता है, जिससे आमदनी बढ़ती है, जैव विविधता बढ़ती है और मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुधरता है। मिलेट्स में बहुत-से पोषक तत्व पाए जाते हैं जो स्वास्थ के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। इन सब चीजों को जानने के बात उन्होंने अपनी मिलेट्स की खेती आधुनिक तकनीक अपनाकर अपनी 5 एकड़ जमीन में खेती की शुरुआत की और आज वे इसकी खेती सफलता पूर्वक कर रहे हैं।
मिलेट्स से कमा रहे लाखों में
नृपेंद्र जी अपने खेत में बहुत सी फसलें उगाते हैं। उनसे कितनी आमदनी होती है और अकेले मिलेट्स से कितनी आमदनी होती है,आइए जानते हैं मक्का से – 42,000 रु,मूंग – 85,000 रु,अरहर – 5,000 रु, तिल – 40,000 रु, गन्ना – 1,20,000 रु. इन सबको मिलाकर कुल आमदनी रु 3,37,000 होती है, जिसमें सिर्फ मिलेट्स से आमदनी रु 2,00,000 होती है। मिलेट्स ने उनकी आमदनी बहुत बढ़ा दी है।
उनकी मिलेट्स की खेती की सफलता देखकर उनके ज़िले के किसानों ने भी मिलेट्स की खेती ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है।
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