आलू की अगेती खेती के लिए ये किस्म बहुत आदर्श मानी जाती है इनकी खेती से न केवल ज्यादा उत्पादन मिलता है बल्कि बाजार में नए आलू के दाम भी अच्छे प्राप्त होते है। तो आइये इस आर्टिकल के माध्यम से जानते है कौन सी किस्में है।
सितंबर में आलू की ये 3 किस्मों की करें बुआई
सितंबर के महीने में आलू की अगेती खेती करने से उत्पादन जल्दी प्राप्त होता है और बाजार में जल्दी आलू पहुंचने से अच्छा मूल्य मिलता है साथ ही अगली फसलों की बुवाई के लिए खेत खाली हो जाते है जिससे किसानों की आय में बेशुमार वृद्धि होती है। आलू की खेती के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली रोग प्रतिरोधक किस्मों का चयन करना उचित होता है आलू की ये कुछ उन्नत किस्में बहुत अच्छी उपज देने वाली होती है इन किस्मों का उपयोग ज्यादा तर चिप्स, और फ्रेंच फ्राइज जैसे कई अन्य व्यंजन बनाने में होता है जो मार्केट में बहुत डिमांडिंग होते है। इनकी खेती से किसान अच्छा उत्पादन और मुनाफा प्राप्त कर सकते है।
आलू की कुफरी चंद्रमुखी किस्म
आलू की खेती के लिए कुफरी चंद्रमुखी किस्म का चयन करना बहुत लाभकारी साबित होता है इस किस्म का गूदा सख्त, चिकना और मोम जैसा होता है जिससे ये उबालने, तलने, भूनने और मैश करने के लिए उपयुक्त साबित होते है। ये किस्म सामान्य फफूंद और विषाणुओं के प्रति कुछ हद तक प्रतिरोधी होती है। इसकी खेती के लिए उचित जल धारण क्षमता वाली भूमि उपयुक्त होती है। इसकी खेती में गोबर की खाद का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए बुआई के बाद आलू की कुफरी चंद्रमुखी किस्म की फसल करीब 80-90 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म की औसत उपज 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

आलू की कुफरी जवाहर किस्म
आलू की कुफरी जवाहर आलू की एक अगेती किस्म है ये किस्म मार्केट में बहुत डिमांडिंग होती है क्योकि इसके कंद गोल से अंडाकार, चमकीले सफेद छिलके और सफेद गूदे वाले होते है। इसकी खासियत ये है की ये किस्म अगेती झुलसा और फोम रोग के प्रति प्रतिरोधी है। इसकी खेती के लिए जीवांश युक्त बलुई-दोमट मिट्टी अच्छी होती है इस मिट्टी में अच्छी जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। आलू की कुफरी जवाहर किस्म 80-90 में तैयार हो जाती है एक हेक्टेयर में इसकी खेती करने से 250-300 क्विंटल तक का उत्पादन मिलता है आप इसकी खेती से लाखों रुपए का मुनाफा कमा सकते है।
