बैंगन की खेती के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली उन्नत किस्मों का चयन करना लाभदायक होता है अच्छी किस्में न केवल ज्यादा उपज देती है बल्कि कीटों और रोगों के प्रतिरोधी भी होती है जिससे खेती में कीटनाशक का खर्चा कम होता है।
सितंबर में लगाएं बैंगन की ये उन्नत किस्में
बैंगन की खेती किसान बड़े पैमाने पर करते है और अच्छा प्रॉफिट कमाते है बैंगन किसानों की आय का एक उच्च स्रोत होती है इसकी खेती साल में कभी भी की जा सकती है। बैंगन की खेती के लिए हम आपको कुछ ऐसी किस्मों के बारे में बता रहे है जो मार्केट में बहुत डिमांडिंग होती है इनकी खेती में खर्चा भी अधिक नहीं होता है और कम दिनों में फसल तैयार हो जाती है। तो आइये इस आर्टिकल के जरिये बैंगन की उन्नत प्रजातियों के बारे में जानते है।

बैंगन की पूसा पर्पल क्लस्टर किस्म
बैंगन की पूसा पर्पल क्लस्टर किस्म एक उच्च गुणवत्ता और बंपर उत्पादन देने वाली प्रजाति है ये न केवल खेती के लिए उपयुक्त होती है बल्कि इसे किचन गार्डन या बगीचे में भी उगाया जा सकता है। इसकी खेती व्यावसायिक रूप से की जाती है किसान भाई इसकी खेती से बहुत अच्छा मुनाफा कमा सकते है इसके पौधों को पहले नर्सरी में तैयार किया जाता है फिर खेत में रोपा जाता है।बैंगन की पूसा पर्पल क्लस्टर किस्म प्रति हेक्टेयर लगभग 60 से 65 टन तक उत्पादन देती है। अगर आप इसे 10 रूपए किलो के हिसाब से भी बेचते है तो 6,50,000 रूपए की कमाई कर सकते है।
बैंगन की पूसा हाइब्रिड-5 किस्म
बैंगन की खेती के लिए किसान भाई बैंगन की पूसा हाइब्रिड-5 किस्म का चुनाव भी कर सकते है ये किस्म अपने एक गहरे बैंगनी रंग और लंबे आकर्षित फलों के लिए जानी जाती है इसकी बिक्री बाजार में बहुत होती है। क्योकि इसमें बीज कम होते है। बैंगन की पूसा हाइब्रिड-5 किस्म की खेती के लिए पहले खेत को जोतकर तैयार किया जाता है फिर मिट्टी में कम्पोस्ट खाद डाली जाती है। इसकी खेती में ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करना बहुत फायदे का साबित होता है जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है। रोपाई के बाद बैंगन की पूसा हाइब्रिड-5 किस्म फसल 70 से 80 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ 20 से 26 टन उपज देती है।
बैंगन की स्वर्ण शक्ति किस्म
स्वर्ण शक्ति बैंगन की सबसे अच्छी किस्मों में से एक है ये किस्म जीवानुज मुरझा रोग के मध्यम प्रतिरोधी और फमोप्पिसस ब्लाईट के प्रतिरोधी है इसकी खेती के लिए उचित जल निकास वाली मिट्टी की जरूरत होती है। बुवाई के लिए बीज दर 150-200 ग्राम प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है। इसकी खेती में रोपाई की दूरी 60 सेंटीमीटर X 50 सेंटीमीटर रखना चाहिए और गोबर की खाद का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। रोपाई के बाद लगभग 55-60 दिन में फल प्रथम तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते है। एक हेक्टेयर जमीन में बैंगन की स्वर्ण शक्ति किस्म की खेती करने से 700 से 750 क्विंटल बैंगन की पैदावार प्राप्त होती है।