शकरकंद की खेती कैसे करें, इसकी खेती का समय और शकरकंद की खेती में कमाई व खर्चा, चलिए सब कुछ जानते हैं।
शकरकंद की खेती
शकरकंद की खेती में किसानों को अच्छा मुनाफा हो सकता है। यह जल्दी तैयार होने वाली फसल है। इसे कई तरह की मिट्टी और जलवायु में आसानी से किसान उगा सकते हैं। यह सेहत के लिए फायदेमंद है, जिससे इसकी डिमांड बनी रहती है। सबसे अच्छी बात यह है कि आगे आने वाले त्योहारों में जैसे दिवाली, छठ इत्यादि में शकरकंद की डिमांड बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलती है। तो चलिए जानते हैं कि शकरकंद की खेती कैसे करें।
शकरकंद की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। पीएच मान 5.8 से 6.8 के बीच हो तो बेहतर होता है। शकरकंद की खेती के लिए 25 से 34 डिग्री सेल्सियस का तापमान अच्छा माना जाता है।
सबसे पहले इसकी नर्सरी तैयार की जाती है, जिसमें कटिंग लेकर लगाई जाती है। कटिंग में 4 से 5 गांठें होनी चाहिए। कटिंग का उपचार करना जरूरी होता है। रोपाई मेड़ों में करें, ताकि निकालने में आसानी हो। मेड़ों में लगभग 60×20 सेंटीमीटर की दूरी पर कटिंग की रोपाई करें। शकरकंद की फसल 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है। कुछ किस्मों में 120 से 150 दिन भी लग जाते हैं।
शकरकंद की प्रसिद्ध किस्में
शकरकंद की खेती के लिए किसानों को अच्छी किस्म का चुनाव करना चाहिए, जिससे बेहतर कीमत मिले। किस्म चुनते समय क्षेत्र की जलवायु और आसपास की मंडियों की डिमांड की जानकारी लेना जरूरी है।
- शकरकंद की कई प्रसिद्ध किस्में हैं, जिनमें गार्नेट, ज्वेल, पर्पल स्टोक, हन्ना जापानी का नाम आता है।
- भारत में श्री अरुण, एसटी 13, एसटी14, पंजाब मीठा आलू 21, राजेंद्र शकरकंद, पूसा सुहावनी, श्री नंदिनी, श्री रतन, पूसा रेड, जवाहर शकरकंद 145, एच-268, एच-41, भवन शंकर, वर्षा, श्री वरुण आदि प्रमुख हैं।
इनमें गार्नेट किस्म बहुत मीठी होती है। इसका छिलका गुलाबी होता है। श्री अरुण किस्म को भारत में काफी पसंद किया जाता है क्योंकि यह अच्छा उत्पादन देती है। “भूख कृष्णा” किस्म भी अधिक उत्पादन देने वाली वैरायटी है, यह 18 टन तक का उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इसका छिलका पीले रंग का दिखाई देता है।

शकरकंद की खेती में कमाई
हर किसान यह जानना चाहता है कि उस खेती से कमाई कितनी होगी। शकरकंद की खेती से भी मुनाफा उत्पादन और गुणवत्ता पर निर्भर करता है। अच्छी तरह से खेती करने पर एक एकड़ से 200 से 300 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है। इससे प्रति एकड़ लगभग 2 से 3 लाख रुपए की कमाई हो सकती है।
यदि बाजार में कीमत अच्छी मिल जाए तो खर्चा कम और मुनाफा ज्यादा हो जाता है। लेकिन इसके लिए समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, कीट व रोग प्रबंधन और उन्नत किस्म का चुनाव जरूरी है। साथ ही स्थानीय मंडी और बाजार की स्थिति अच्छी होनी चाहिए।
शकरकंद की खेती में खर्चा
खर्च की बात करें तो खेत की तैयारी, मेड़ बनाने, कटिंग लगाने, मिट्टी को भुरभुरा करने, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और खुदाई में कई तरह के खर्चे आते हैं।
एक एकड़ में लगभग 15,000 से 20,000 रुपए का खर्च आता है। यह मिट्टी, रोपाई, खाद और अन्य साधनों पर निर्भर करता है। किसान यदि खुद मेहनत करें और उनके पास कृषि यंत्र हों, तो खर्च और कम हो सकता है।
शकरकंद की खेती का समय
शकरकंद की मांग त्योहारों के समय अधिक रहती है। वहीं इसकी खेती में लगभग 3 महीने का समय लगता है। जिससे किसान जुलाई में इसकी खेती करते हैं। फरवरी से मार्च और जून से जुलाई का समय भी इसकी बुवाई के लिए अच्छा माना जाता है।
शकरकंद को गर्म मौसम पसंद होता है। इसके लिए जल निकासी वाली जमीन का चयन करना जरूरी है। अधिक पानी रुकने से फसल को नुकसान होता है। बरसात में खेती करते समय पानी का ध्यान रखना जरूरी है। कटाई की बात करें तो शकरकंद सितंबर से अक्टूबर के बीच तैयार हो जाती है।
शकरकंद का बीज कहां मिलेगा
अगर किसानों को आसपास बीज के दुकानों में शकरकंद का बीज नहीं मिल रहा है तो वे इसे ऑनलाइन घर बैठे मंगा सकते हैं। कई कृषि दुकानें अब ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय बीज निगम (NTC) की वेबसाइट पर शकरकंद का बीज मिलता है। इसके अलावा अमेज़न जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट से भी किसान बीज मंगा सकते हैं।

नमस्ते, मैं निकिता सिंह । मैं 3 साल से पत्रकारिता कर रही हूं । मुझे खेती-किसानी के विषय में विशेषज्ञता प्राप्त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी तरो ताजा खबरें बताउंगी। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको ‘काम की खबर’ दे सकूं । जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप https://khetitalks.com के साथ जुड़े रहिए । धन्यवाद












